कश्मीर के हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग ने पश्मीना प्रयोगशाला में एसईएम आधारित परीक्षण शुरू किया

 

श्रीनगर, 27 मार्च (हि.स.)। पश्मीना परीक्षण एवं गुणवत्ता प्रमाणन केंद्र को फाइबर विश्लेषण में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के तहत कश्मीर के हस्तशिल्प एवं हथकरघा निदेशालय ने एक उच्च स्तरीय स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप खरीदा है।

इस पहल का उद्देश्य पश्मीना और अन्य हथकरघा उत्पादों के जीआई परीक्षण और प्रमाणन में वैश्विक मानकों को प्राप्त करना है।

इसके अलावा विभाग ने पीटीक्यूसीसी, आईआईसीटी में कालीन प्रयोगशाला और नव स्थापित गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला के लिए तीन उच्च-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल माइक्रोस्कोप खरीदे हैं। इन उपकरणों से परीक्षण क्षमता में वृद्धि, प्रतीक्षा समय में कमी और जीआई-अधिकृत उपयोगकर्ताओं, व्यावसायिक हितधारकों और कारीगर समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों को पूरा करने की उम्मीद है।

कश्मीर के हस्तशिल्प एवं हथकरघा निदेशालय के प्रवक्ता द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार एसईएम आधारित परीक्षण से रेशों का सटीक विश्लेषण और बेहतर होगा तथा असली पश्मीना और अन्य रेशों के बीच स्पष्ट अंतर करना आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रगति शुद्ध पश्मीना उत्पादों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने में सहायक होगी और कारीगरों एवं व्यापारियों को कश्मीर के असली हस्तनिर्मित उत्पादों के नाम पर बेचे जा रहे नकली और भ्रामक सामानों से बचाएगी।

उन्होंने परीक्षण प्रयोगशालाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में वस्त्र मंत्रालय के पूर्ण सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। वस्त्र मंत्रालय के राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम के ‘प्रौद्योगिकी सहायता’ घटक के तहत प्राप्त एसईएम की शुरुआत से कश्मीर की उत्कृष्ट वस्त्र विरासत, विशेष रूप से पश्मीना और कानी शॉल की प्रामाणिकता, गुणवत्ता आश्वासन और वैश्विक विश्वसनीयता और मजबूत होगी। उन्होंने आगे कहा कि नए उपकरण से प्रयोगशाला में विभिन्न कार्बनिक एवं अकार्बनिक पदार्थों का परीक्षण भी संभव हो सकेगा।

इसी प्रकार पीटीक्यूसीसी, आईआईसीटी और गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशालाओं में उच्च-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल माइक्रोस्कोप की शुरुआत से परीक्षण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और परिणाम आने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा, जो जीआई अधिकृत उपयोगकर्ताओं के साथ-साथ कारीगर समुदाय की भी प्रमुख मांग रही है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता