आखिरी नहीं भारत का पहला गांव है करोल कृष्ण-एलजी मनोज सिन्हा
कठुआ 20 अगस्त (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कठुआ जिले के सीमावर्ती गांव करोल कृष्ण का दौरा किया।
अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने करोल कृष्ण को भारत का आखिरी गांव नहीं बल्कि भारत का पहला गांव और देश के प्रवेश द्वार के रूप में वर्णित किया।
उपराज्यपाल ने कहा कि सीमा पर बसे गांव भारत की पहचान की अग्रिम पंक्ति हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास को नई गति मिली है।
एलजी सिन्हा ने अपने पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती गांव अब विकास की मुख्यधारा से दूर नहीं बल्कि विकास के केंद्र में हैं।
उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, दूरसंचार और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं घर-घर तक पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों का विकास केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि यह देश की सीमाओं पर रहने वाले नागरिकों को सशक्त बनाने और राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
करोल कृष्ण जैसे गांव भारत की सीमा, सामर्थ्य और विकास की जीवंत तस्वीर पेश करते हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया