जम्मू-कश्मीर विधानसभा में फिर उठा आरक्षण का मुद्दा, स्थगन प्रस्ताव नामंजूर
जम्मू, 30 मार्च (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सोमवार को आरक्षण का मुद्दा फिर से उठा। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के विधायक सज्जाद गनी लोन ने कहा कि 1947 से कश्मीर और जम्मू के बीच भर्ती में इस तरह की असमानता कभी नहीं रही है।
शून्यकाल के दौरान लोन ने अध्यक्ष का ध्यान अपने स्थगन प्रस्ताव की ओर दिलाया। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) श्रेणी के लिए मानदंडों को तर्कसंगत बनाने में सरकार की विफलता पर चर्चा की मांग की, जिसके कारण कश्मीरियों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक अवसर सीमित हो रहे हैं। अध्यक्ष ने कहा कि वे स्थगन प्रस्ताव को अस्वीकार नहीं करते हैं, लेकिन इसके लिए इस्तेमाल की गई संसदीय प्रक्रिया उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले को सुलझाने के लिए कानून की आवश्यकता है, तो आप इस पर स्थगन प्रस्ताव नहीं ला सकते। लोन ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि यह मुद्दा पूरी तरह से आरक्षण का नहीं है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) की परिभाषा का है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री सतीश शर्मा की ओर इशारा करते हुए लोन ने कहा कि उनके विभाग के अनुसार कश्मीर में 37 लाख और जम्मू में 29 लाख लोग गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) हैं, लेकिन समाज कल्याण मंत्रालय के अनुसार 90 प्रतिशत गरीब आबादी जम्मू में और 10 प्रतिशत कश्मीर में है। उन्होंने कहा कि आपने हाल ही में कश्मीर न्याय प्रणाली (केएएस) और न्यायिक सेवा के परिणाम देखे हैं। 1947 के बाद से जम्मू और कश्मीर के बीच इस तरह की असमानता कभी नहीं रही।
ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों के मानदंडों पर सवाल उठाते हुए लोन ने कहा कि सरकारी मानदंडों के अनुसार कोई व्यक्ति राशन खरीदने जाते समय गरीब माना जाता है लेकिन नौकरी के लिए आवेदन करते समय अमीर माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह कैसे संभव है। यह वही सरकार है। हम यहां जिस भी बात पर चर्चा करते हैं, वह सिर्फ कानून बनाने तक सीमित नहीं है। लोन ने चेतावनी दी कि मौजूदा ईडब्ल्यूएस मानदंड के कारण भविष्य में होने वाली भर्तियों में कश्मीरियों के साथ भारी अन्याय होगा। उन्होंने आगे कहा कि खाद्य वितरण आंकड़ों के अनुसार 60 प्रतिशत प्रमाण पत्र कश्मीर में और 40 प्रतिशत जम्मू में जारी किए जाने चाहिए थे। लोन ने मांग की कि ईडब्ल्यूएस के मानदंडों में बदलाव किया जाए और केरल को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के आंकड़ों से जोड़ा जाए।
भाजपा विधायक नरिंदर सिंह खालसा ने लोन के दावों का खंडन करते हुए कहा कि पीडीएस आंकड़ों का उपयोग ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जारी करने के लिए नहीं किया जा सकता है। हालांकि अध्यक्ष ने भाजपा विधायक से कहा कि यह मामला लोन और उनके बीच का है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह