सरकार ने विधायकों को जानलेवा बीमारियों के इलाज के लिए सालाना 20 लाख रुपये के सीडीएफ का इस्तेमाल करने की दी अनुमति
श्रीनगर, 06 जुलाई (हि.स.)। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवा सहायता को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार ने निर्वाचन क्षेत्र विकास निधि (सीडीएफ) योजना के दिशानिर्देशों में संशोधन किया है। इसके तहत विधायकों को अपने सीडीएफ से जानलेवा बीमारियों से पीड़ित मरीजों की चिकित्सा सहायता के लिए प्रतिवर्ष 20 लाख रुपये तक आवंटित करने की अनुमति दी गई है। यह संशोधन वित्त विभाग द्वारा 6 जुलाई, 2026 को जारी सरकारी आदेश संख्या एफडी 2026 के माध्यम से अधिसूचित किया गया है जो 30 अक्टूबर, 2025 के सरकारी आदेश संख्या 279-एफडी 2025 में आंशिक संशोधन करता है।
संशोधित दिशानिर्देशों के तहत गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों और सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणियों को सहायता उपलब्ध होगी। वित्तीय सहायता में निर्दिष्ट जानलेवा बीमारियों का उपचार शामिल होगा जिनमें कैंसर, अंग प्रत्यारोपण, डायलिसिस या प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाली पुरानी गुर्दा रोग और सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित अन्य बीमारियां शामिल हैं।
इस आदेश के अनुसार कैंसर के इलाज के लिए अधिकतम 2.75 लाख रुपये, अंग प्रत्यारोपण के लिए 5 लाख रुपये और डायलिसिस की आवश्यकता वाले गंभीर गुर्दे की बीमारी के लिए 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सहायता केवल उपचार लागत के उस हिस्से के लिए दी जाएगी जो मौजूदा स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत कवर नहीं है। विधायक सीडीएफ के तहत सहायता प्राप्त करने से पहले रोगियों को पीएम-जय सेहत, मेडिकल एड ट्रस्ट (मैट), कैंसर ट्रीटमेंट एंड मैनेजमेंट फंड फॉर पुअर (सीटीएमएफएफपी) और अन्य लागू योजनाओं जैसे सरकारी प्रायोजित कार्यक्रमों के तहत उपलब्ध लाभों का उपयोग करना होगा।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भुगतान लाभार्थियों को नहीं बल्कि सूचीबद्ध अस्पतालों या चिकित्सा संस्थानों को सीधे किया संपर्क जाएगा। प्रत्येक मामले में सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी से प्रमाण पत्र और संबंधित जिला अधिकारियों द्वारा आवेदक की आय पात्रता का सत्यापन आवश्यक है। वित्त विभाग ने धन के दुरुपयोग को रोकने और संशोधित प्रावधानों के कार्यान्वयन में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक पारदर्शी अनुमोदन और लेखापरीक्षा तंत्र भी अनिवार्य किया है। इस संशोधन से आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के उन रोगियों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलने की उम्मीद है जिन्हें गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए उच्च लागत का सामना करना पड़ता है, साथ ही यह मौजूदा सरकारी स्वास्थ्य देखभाल योजनाओं का पूरक भी होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता