मुख्य सचिव ने मिशन ज्ञान भारतम के तहत पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए जनभागीदारी का आह्वान किया

 

जम्मू 4 फ़रवरी (हि.स.। मुख्य सचिव अटल दुल्लू ने आज संस्कृति विभाग से आग्रह किया कि वह भारत सरकार के प्रमुख कार्यक्रम मिशन ज्ञान भारतम के तहत दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान, डिजिटलीकरण और संरक्षण में लोगों को सक्रिय रूप से शामिल करे और उन्हें आगे आने के लिए प्रोत्साहित करे।

केंद्र शासित प्रदेश में मिशन के कार्यान्वयन पर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए, मुख्य सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की समृद्ध पांडुलिपि विरासत की रक्षा के लिए जनभागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसका अधिकांश भाग निजी स्वामित्व में है या धार्मिक और पारंपरिक संस्थानों में रखा गया है।

बैठक में संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव; आवास एवं शहरी विकास विभाग के आयुक्त सचिव; संभागीय आयुक्त, जम्मू/कश्मीर; ग्रामीण विकास विभाग के सचिव; पुस्तकालय महानिदेशक; संस्कृति विभाग के सचिव; महाविद्यालय निदेशक; अभिलेखागार, पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशक और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने गहन जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया, जिन्हें पांडुलिपि संरक्षण प्रयासों में योगदान दे चुके पेशेवरों और व्यक्तियों के सहयोग से चलाया जाना चाहिए। उन्होंने धार्मिक प्रमुखों, नागरिक समाज संगठनों और स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी का भी आह्वान किया, क्योंकि केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में मूल्यवान पांडुलिपियाँ संरक्षित हैं।

कार्य के महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्य सचिव ने सर्वेक्षण और निगरानी में लगे फील्ड अधिकारियों की क्षमता निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रक्रिया की देखरेख के लिए प्रत्येक ब्लॉक में एक नामित पर्यवेक्षक अधिकारी नियुक्त किया जाए। सफल मिशन युवा पहल का उदाहरण देते हुए, उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से केंद्र शासित प्रदेश-व्यापी घरेलू सर्वेक्षण सुनिश्चित करने के लिए इसी तरह के प्रौद्योगिकी-आधारित दृष्टिकोण को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने उपायुक्तों को इस संवेदनशील कार्य को पूरा करने के लिए सक्षम कर्मियों की पहचान करने का भी निर्देश दिया।

इस अवसर पर बोलते हुए, संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव, बृज मोहन शर्मा ने बताया कि मिशन ज्ञान भारतम का उद्देश्य देश भर में एक करोड़ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण करके भारतीय ज्ञान प्रणालियों का एक राष्ट्रीय डिजिटल भंडार स्थापित करना है, जिससे निर्बाध ज्ञान साझाकरण और भारत की बौद्धिक विरासत का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मिशन तीन 'डी' (डिजिटलीकरण), 'पाठ्यलेखन' (डिक्रिप्टिंग) और 'लोकतांत्रिकरण) को प्राप्त करने पर केंद्रित है, जिसके लिए '4एस' रणनीति अपनाई जा रही है। इस रणनीति में पांडुलिपियों की खोज, उन्हें सहेजना, स्कैन करना और अंततः उन्हें सुलभ और स्पष्ट रूप में सार्वजनिक रूप से साझा करना शामिल है।

हिन्दुस्थान समाचार / SONIA LALOTRA