जम्मू के स्कूली बच्चों ने प्रार्थना की और नेपाल बाढ़ राहत कार्य में दिया योगदान
जम्मू, 29 अगस्त (हि.स.)। नेपाल में जानलेवा बाढ़ से मची तबाही के बीच जम्मू के स्कूली बच्चे प्रार्थना करने, प्रभावित परिवारों के प्रति एकजुटता व्यक्त करने और राहत कार्यों में योगदान देने के लिए एक साथ आए हैं। होंठों पर प्रार्थना और दिलों में चिंता लिए शिक्षा निकेतन और दीवान देवी उच्च माध्यमिक विद्यालयों के छात्र अपने विद्यालय के मैदान में उन लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित हुए जिन्होंने अपनी जान गंवाई और उन परिवारों को याद किया जो अभी भी लापता प्रियजनों के समाचार की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
शिक्षा निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय में छात्रों और उनके अभिभावकों ने बाढ़ राहत के लिए स्वैच्छिक दान अभियान में भाग लिया और अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दिया। प्रधानाचार्य रामेश्वर मेंगी ने कहा कि नेपाल हमारा पड़ोसी देश है और हम उसके साथ खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य छात्रों को यह सिखाना है कि करुणा को कार्यों में बदलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम बच्चों में यह भावना पैदा करना चाहते थे कि हमें किसी की सेवा या मदद करने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए। सरकार पहले से ही सहायता प्रदान कर रही है लेकिन हम भी अपना योगदान देना चाहते हैं।
मेंगी ने यह भी बताया कि छात्रों और उनके अभिभावकों की प्रतिक्रिया ने उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया है। बच्चों के लिए यह आपदा महज एक दूर की खबर नहीं थी। स्कूल के मैदान में खड़े होकर कई बच्चों ने नेपाल में लापता अपने प्रियजनों की खबर का बेसब्री से इंतजार कर रहे परिवारों के बारे में बताया। एक छात्रा भूमि ने कहा कि रसुवा और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में हुई तबाही ने उसे बहुत दुखी किया है। उसने कहा कि बहुत से लोग लापता हैं और कई लोगों ने अपनी जान गंवाई है। मैं उन परिवारों के लिए प्रार्थना करना चाहती हूं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है और उन लोगों के लिए भी जो अभी भी लापता हैं जिनके परिवारों को यह भी नहीं पता कि वे जीवित हैं या मृत।
एक अन्य छात्रा एंजेल ने अन्य संस्थानों और संगठनों से राहत कार्यों में योगदान देने की अपील की। उसने कहा कि मैं अन्य संस्थानों और संगठनों से भी अपील करती हूं कि वे अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दें और बाढ़ से प्रभावित लोगों की हर संभव मदद करें।
शनिवार को नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या 626 हो गई जबकि लगभग 2,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता