जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जलविद्युत राजनीति की वापसी, एनएचपीसी से बिजली परियोजनाएं वापस लेने का अहम प्रस्ताव सूचीबद्ध

 

जम्मू, 23 फ़रवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) से बिजली परियोजनाएं वापस लेने की मांग वाला एक अहम प्रस्ताव 27 मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र के दूसरे चरण के कार्यसूची में सूचीबद्ध होने वाला है। एनसी विधायक सज्जाद शाहीन द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव पर सदन में 2 अप्रैल को विचार किया जाएगा जो निजी सदस्य प्रस्तावों के लिए निर्धारित दो दिनों में से एक है। यह प्रस्ताव उन 14 प्रस्तावों में शामिल है जिन्हें मतदान के माध्यम से ऐसे कार्यसूची के लिए आरक्षित दो दिनों के लिए चुना गया है। प्रस्ताव में कहा गया है, “यह सदन सिफारिश करता है कि भारत सरकार से आग्रह किया जाए कि वह केंद्र शासित प्रदेश सरकार और अन्य हितधारकों से परामर्श करके, संवैधानिक प्रावधानों और मौजूदा अंतर-सरकारी समझौतों के अनुसार जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में एनएचपीसी द्वारा संचालित जलविद्युत परियोजनाओं के परिचालन नियंत्रण और/या स्वामित्व अधिकारों को चरणबद्ध और पारस्परिक सहमति से केंद्र शासित प्रदेश सरकार को हस्तांतरित करने पर विचार करे।”

जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था और राजनीति के लिए इसके महत्व को देखते हुए बजट सत्र के दूसरे भाग में इस प्रस्ताव पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। पहले जम्मू और कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियों ने अपने घोषणापत्रों में बिजली परियोजनाओं की वापसी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी थी लेकिन वे कोई ठोस उपलब्धि हासिल करने में विफल रहीं।

अपने गठबंधन एजेंडा में पीडीपी-भाजपा गठबंधन ने वादा किया था कि “राज्य सरकार रंगराजन समिति की रिपोर्ट और गोलमेज सम्मेलन की रिपोर्टों के अनुसार दुलहस्ती और उड़ी जलविद्युत परियोजनाओं को जम्मू और कश्मीर को हस्तांतरित करने के तौर-तरीकों का पता लगाने के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करेगी।” यह मुद्दा 2024 के विधानसभा चुनावों के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के घोषणापत्र में भी शामिल था जिसमें कहा गया है: “भारत सरकार पर दबाव डालें कि वह सी. रंगराजन समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों को अक्षरशः लागू करे। समझौते के अनुसार अन्य सभी जलविद्युत परियोजनाएं जम्मू और कश्मीर को हस्तांतरित की जाएं।”

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता