सरकारी अधिकारियों के बच्चों के लिए सरकारी शिक्षा अनिवार्य करने वाला विधेयक सदन में खारिज

 

श्रीनगर, 24 सितंबर (हि.स.)। विधानसभा ने गुरुवार को एक निजी सदस्य के विधेयक को खारिज कर दिया जिसमें सार्वजनिक प्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारियों के बच्चों के लिए सरकारी शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य नामांकन की मांग की गई थी। लंगेट के विधायक शेख खुर्शीद अहमद द्वारा पेश किए गए इस विधेयक में सार्वजनिक व्यक्तियों और सार्वजनिक कर्मचारियों के बच्चों के लिए सरकारी शिक्षा अनिवार्य बनाने के उद्देश्य से कानून पेश करने की अनुमति मांगी गई थी।

सरकार ने विधेयक का विरोध किया और संबंधित मंत्री ने कहा कि हालांकि वह इसके उद्देश्य का सम्मान करती हैं लेकिन सरकारी स्कूलों में अनिवार्य नामांकन व्यावहारिक नहीं है।

मंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे का उन्नयन किया जा रहा है और स्वीकार किया कि कुछ स्कूलों में अभी भी सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शेष स्कूलों का भी भविष्य में उन्नयन किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि बच्चों को अपनी शिक्षा प्राप्त करने के लिए संस्थान चुनने का मौलिक अधिकार और स्वतंत्रता है।

उन्होंने सरकारी स्कूलों से नीट उत्तीर्ण करने वाले छात्रों का उदाहरण देते हुए यह रेखांकित किया कि इन संस्थानों के छात्र सफलता प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नामांकन अनिवार्य करने के बजाय सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता के बारे में लोगों को आश्वस्त करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए और खुर्शीद से विधेयक वापस लेने का अनुरोध किया।

विधायक ने विधेयक पर जोर देते हुए तर्क दिया कि केवल बुनियादी ढांचे से सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि नामांकन भी उतना ही महत्वपूर्ण है और नामांकन बढ़ाने से सरकारी स्कूलों की समग्र स्थिति में सुधार हो सकता है। विधायक ने आगे कहा कि नीति निर्माताओं को इस मुद्दे पर विचार करना चाहिए और तर्क दिया कि मंत्रियों, विधायकों और सरकारी कर्मचारियों के बच्चों का भी सरकारी स्कूलों में नामांकन होना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता