अदालती जवाबों और हलफनामों में देरी को लेकर सरकार ने विभागों को सख्त निर्देश जारी किए

 

श्रीनगर, 22 अक्टूबर (हि.स.)। जम्मू और कश्मीर सरकार ने सभी प्रशासनिक विभागों और संबंधित अधिकारियों को अदालतों और न्यायाधिकरणों में लंबित मुकदमों में समय पर जवाब, हलफनामे और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं विशेष रूप से अवमानना कार्यवाही पर जोर दिया गया है।

कानून, न्याय और संसदीय कार्य विभाग ने परिपत्र संख्या 15-जेके (एलडी) के माध्यम से प्रशासनिक विभागों, विभागाध्यक्षों और अन्य संबंधित अधिकारियों को अदालतों और न्यायाधिकरणों के समक्ष सरकार का प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और प्रतिकूल न्यायिक आदेशों को जन्म देने वाली देरी को रोकने का निर्देश दिया है।

सरकार के आयुक्त सचिव अचल सेठी द्वारा जारी परिपत्र में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण, श्रीनगर बेंच द्वारा 14 अगस्त, 2026 को पारित आदेश का संदर्भ दिया गया है जो कि अश्वनी कुमार बनाम एच. राजेश प्रसाद और अन्य के मामले में टी.ए. से संबंधित है। क्रमांक 733/2022 निर्देशों के अनुसार प्रशासनिक विभागों को संबंधित विधि अधिकारी और मुकदमेबाजी प्रभारी अधिकारी (ओआईसी) को पर्याप्त समय पहले पूर्ण अभिलेख, प्रासंगिक दस्तावेज और विशिष्ट तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है ताकि समय पर उत्तर और हलफनामे तैयार करने और दाखिल करने में सुविधा हो।

परिपत्र में आगे कहा गया है कि न्यायिक निर्देशों के कार्यान्वयन से संबंधित मामलों में दस्तावेजी साक्ष्यों द्वारा समर्थित नवीनतम अनुपालन स्थिति, न्यायालय या न्यायाधिकरण द्वारा निर्धारित समय सीमा से काफी पहले संबंधित विधि अधिकारी और ओआईसी को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसमें मुकदमेबाजी प्रभारी अधिकारियों को संबंधित प्रशासनिक विभागों और विधि अधिकारियों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखने का भी निर्देश दिया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उत्तर, हलफनामे और अनुपालन रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर दाखिल की जाएं। न्यायिक कार्यवाही में देरी को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने चेतावनी दी है कि आवश्यक अभिलेखों, निर्देशों या अनुपालन रिपोर्टों को प्रस्तुत करने में किसी भी प्रकार की देरी या विफलता जिसके परिणामस्वरूप उत्तर या हलफनामे दाखिल न किए जाएं या प्रतिकूल न्यायिक आदेश जारी हों को गंभीरता से लिया जाएगा। परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि लागू नियमों के अनुसार संबंधित अधिकारियों पर उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाएगा। आवश्यक अनुपालन के लिए ये निर्देश एडवोकेट जनरल, सभी प्रशासनिक सचिवों, केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के रजिस्ट्रार (जम्मू और श्रीनगर बेंच), जम्मू और कश्मीर के संभागीय आयुक्तों, सरकारी वकीलों, उपायुक्तों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों को प्रेषित किए गए हैं।

सरकारी मुकदमेबाजी में समन्वय को मजबूत करने के लिए जम्मू और कश्मीर के मुकदमेबाजी निदेशक और अन्य नामित अधिकारियों को भी इस संचार ढांचे के अंतर्गत लाया गया है। इस कदम का उद्देश्य सरकार की कानूनी तैयारियों में सुधार करना, न्यायिक निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करना और अदालती कार्यवाही में अनावश्यक देरी को कम करना है, विशेष रूप से अवमानना मामलों में जहां न्यायिक आदेशों का अनुपालन न करने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता