सरकार ने 13 साल की देरी के बाद आईएफओएस में 32 अधिकारियों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की

 

जम्मू, 26 मई(हि.स.)। एक महत्वपूर्ण कदम में जम्मू-कश्मीर सरकार ने लगभग 32 अधिकारियों को भारतीय वन सेवा आईएफओएस में शामिल करने की लंबे समय से लंबित प्रक्रिया शुरू कर दी है जिससे 13 वर्षों से अधिक समय से जारी गतिरोध समाप्त हो गया है।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि वन विभाग एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रहा है जिसे संघ लोक सेवा आयोग यूपीएससी द्वारा अनुमोदन और आगे की कार्रवाई के लिए जल्द ही केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय एमओईएफ एंड सीसी को भेजा जाएगा। केंद्रीय मंत्रालय से ताजा संचार के बाद प्रक्रिया में तेजी आई जिससे प्रस्ताव प्रस्तुत करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। वन विभाग की आयुक्त सचिव शीतल नंदा ने पुष्टि की कि विभाग आईएफओएस में अधिकारियों को शामिल करने के प्रस्ताव को अंतिम रूप दे रहा है।

हम प्रस्ताव का मसौदा तैयार कर रहे हैं और सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इसे मंत्रालय को सौंप दिया जाएगा।

सूत्रों से पता चला है कि जम्मू-कश्मीर के लगभग 32 अधिकारियों को प्रतिष्ठित अखिल भारतीय सेवा में शामिल होने की संभावना है जो कि एमओइएफ़ और यूपीएससी से मंजूरी के अधीन है। राज्य वन सेवा एसएफएस के गठन से संबंधित कानूनी विवादों और प्रक्रियात्मक जटिलताओं के कारण 2012 से प्रेरण प्रक्रिया निलंबित थी। सेवा नियमों के अनुसार आईएफओएस में 66 प्रतिशत पद यूपीएससी द्वारा सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाते हैं जबकि 33 प्रतिशत राज्य वन सेवा अधिकारियों की पदोन्नति के लिए आरक्षित हैं।

अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय मंत्रालय ने लंबित कानूनी और प्रशासनिक मुद्दों के कारण चयन वर्ष 2012 के बाद जम्मू और कश्मीर के लिए पदोन्नति कोटा रिक्तियां तय नहीं की हैं। सूत्रों ने आगे बताया कि राज्य वन सेवा के गठन से संबंधित प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन के बाद 11 दिसंबर, 2025 को केंद्रीय मंत्रालय को भेजा गया था।

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हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता