सरकार अगले दो महीनों के भीतर जम्मू और कश्मीर में फसल बीमा योजना लागू कर सकती है-मंत्री जावेद डार

 

सोपोर, 23 मई (हि.स.)। मंत्री जावेद अहमद डार ने शनिवार को कहा कि सरकार अगले दो महीनों के भीतर जम्मू और कश्मीर में फसल बीमा योजना लागू कर सकती है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि हाल ही में हुई ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद राहत दी जाएगी।

कश्मीर घाटी के कई हिस्सों में बार-बार हुई ओलावृष्टि से फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचने के बीच पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने किसानों और उत्पादकों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों का दौरा शुरू कर दिया है। डार ने कहा कि विभाग कल से ही प्रत्येक प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचने और आकलन करने का प्रयास कर रहा है। अंतिम आकलन पूरा होने के बाद प्रभावित किसानों को राहत प्रदान की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर में फसल बीमा योजना के कार्यान्वयन की प्रक्रिया में तेजी ला रही है। मंत्री के अनुसार योजना के लिए निविदा प्रक्रिया 1 जून से शुरू होने वाली है और पूरी प्रक्रिया डेढ़ से दो महीने के भीतर पूरी होने की उम्मीद है। मंत्री ने कहा कि सरकार ने योजना के लिए पहले ही बजट में प्रावधान कर दिए हैं जिसके तहत प्रीमियम राशि भारत सरकार, जम्मू-कश्मीर प्रशासन और किसानों द्वारा साझा की जाएगी।

बागवानी क्षेत्र के बारे में डार ने कहा कि सरकार सी-ग्रेड सेब के लिए बाजार हस्तक्षेप योजना के संबंध में केंद्र सरकार के संपर्क में है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग की एक टीम ने दो महीने पहले जम्मू-कश्मीर का दौरा किया था जिसके दौरान उत्पादकों को समर्थन देने के लिए सी-ग्रेड सेब के मूल्य निर्धारण पर चर्चा हुई थी। सेब की फसलों को बीमा कवरेज देने में देरी के बारे में डार ने कहा कि बागवानी एक अलग मौसम-आधारित फसल बीमा योजना के अंतर्गत आती है। उन्होंने आगे बताया कि कश्मीर में प्रस्तावित बीमा योजना में अब सेब और केसर को भी शामिल कर लिया गया है। जम्मू-कश्मीर पर्यटन मंत्री ने कहा कि सरकार कई वर्षों से इस योजना को लागू करने का प्रयास कर रही थी लेकिन निविदा प्रक्रिया के दौरान बीमा कंपनियों की कम भागीदारी के कारण इसमें देरी हुई। उन्होंने कहा कि पिछले साल भी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी लेकिन फिर भारत सरकार ने बीमा पॉलिसी के ढांचे में संशोधन कर दिया जिसके कारण हमें नई निविदाएं जारी करनी पड़ीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता