जम्मू-कश्मीर की अस्मिता और विकास के लिए तत्काल पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिया जाए

 

जम्मू, 24 फ़रवरी (हि.स.)।

देश का ताज व विश्व के सबसे बडे लोकतांत्रिक देश का अभिन्न अंग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र दम तोड़ चुका है। 'अधिकारविहीन' विधानसभा के साथ त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है।

यह तीखा प्रहार शिवसेना (यूबीटी) जम्मू-कश्मीर इकाई के प्रमुख मनीश साहनी ने आज जिला विकास परिषद (डीडीसी) का 5 साल का कार्यकाल समाप्त होने पर व्यक्त किया।

पार्टी प्रदेश मध्यवर्ती कार्यालय में पत्रकारों से विशेष बातचीत पर मनीश साहनी ने कहा का प्रदेश के सभी नगर निकायों का 5 साल का कार्यकाल अक्टूबर-नवंबर 2023 , पंचायतों का 9 जनवरी 2024 और जिला विकास परिषदों का कार्यकाल आज 24 फरवरी 2026 को समाप्त हो चुका है

केंद्र सरकार की त्रि-स्तरीय 'ग्रासरूट डेमोक्रेसी' पर पूरी तरह 'ताला' लग चुका है।

साहनी ने कहा कि 2024 में भारी उत्साह के साथ विधानसभा चुनाव हुए लेकिन त्रासदी देखिए कि चुने हुए विधायकों के पास वह अधिकार ही नहीं हैं जो एक पूर्ण राज्य में होने चाहिए।

जनता का प्रतिनिधि आज बेबस है जबकि बंद कमरों में बैठे नौकरशाह प्रदेश के भाग्य का फैसला कर रहे हैं।

साहनी ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर की अस्मिता और विकास के लिए तत्काल पूर्ण राज्य का दर्जा बहाली व स्थानीय निकायों और पंचायतों के चुनाव कराकर लोकतांत्रिक शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया जाए।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता