फारूक अब्दुल्ला ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर साधा निशाना, दिल्ली के आदेशों पर काम करने का लगया आरोप

 

श्रीनगर,11 जुलाई (हि.स.)। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को दरगाह हजरतबल में तीखे शब्दों में भाषण दिया। उन्होंने केंद्र की पिछली सरकारों पर जम्मू-कश्मीर से किए गए वादों को बार-बार निभाने में विफल रहने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों पर भी सीधा निशाना साधा और उन पर दिल्ली के आदेशों पर काम करने का आरोप लगाया जबकि वे स्थानीय हितों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं।

दशकों पुराने अधूरे वादों को याद करते हुए अब्दुल्ला ने पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दौरान हुई एक बैठक का जिक्र किया और कहा कि उस समय वादा किया गया था कि इस सरकार ने जो भी कमियां पैदा की हैं हम निश्चित रूप से उन पर गौर करेंगे और स्थिति को सुधारेंगे। उन्होंने कहा कि दशकों बाद भी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि हम भी इंसान हैं। हम भी भारत का गौरव हैं - यहां हमारी भी गरिमा है।

एनसी प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई एक बैठक का भी जिक्र किया जिसमें वे वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के साथ शामिल हुए थे। उन्होंने उस समय उपस्थित लोगों से कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम आप पर भरोसा नहीं करते और आप हम पर भरोसा नहीं करते। आइए पहले इस भरोसे को कायम करें। उन्होंने कहा कि दिल्ली और कश्मीर के बीच की दूरी कम करने के आश्वासनों ने व्यवहार में वर्षों से केवल दूरी ही बढ़ाई है।

आक्रामक रुख अपनाते हुए अब्दुल्ला ने अज्ञात स्थानीय प्रतिद्वंद्वियों पर आरोप लगाया कि वे सार्वजनिक रूप से दिल्ली के निर्देशों का समर्थन कर रहे हैं जबकि ज़मीनी स्तर पर अशांति फैला रहे हैं। तीखे शब्दों में उन्होंने उन्हें सीधे चुनौती दी कि क्या आप इस राज्य को बेचने के लिए तैयार हैं। क्या आप अपने माता-पिता की इज्जत बेचने के लिए तैयार हैं। उन्होंने उनसे अपनी गुलामी को त्यागने और जनता के हित में एकजुट होने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि जो लोग राज्य के गरीबों के साथ विश्वासघात करेंगे, उन्हें चैन से नहीं रहने दिया जाएगा और नरक की आग उनका इंतजार कर रही है।

अब्दुल्ला ने बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं पर अपनी पार्टी के प्रयासों की ओर इशारा करते हुए पलटवार किया और दावा किया कि इतने कठिन दौर में कोई और इतना काम नहीं कर सकता था, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और सड़कों पर किए गए कार्यों का हवाला दिया।

एनसी अध्यक्ष ने अपने संबोधन का समापन दृढ़ संकल्प के साथ किया और पार्टी की मांग को दान के बजाय गरिमा और अधिकारों के मुद्दे के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि हम ऐसी किसी चीज की मांग नहीं कर रहे हैं जो हमारी नहीं है। हम केवल अपने अधिकार की मांग कर रहे हैं कि यह अधिकार हमें वापस दिया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता