स्थानीय कारीगरों की प्रदर्शनी ने अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में मचाई धूम
जम्मू, 11 सितंबर (हि.स.)।
अपने प्रशंसित 'नो योर आर्टिसन' कार्यक्रम की सफलता के बाद कश्मीर के हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग ने जम्मू-कश्मीर के पहले अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के दौरान श्रीनगर के एसके पार्क में अपने सितंबर संस्करण का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
कश्मीर के उच्च मूल्य वाले जीआई-टैग प्राप्त और लुप्तप्राय शिल्पों को प्रदर्शित करने पर केंद्रित इस प्रदर्शनी में विभाग ने कला, शिल्प और विरासत का एक जीवंत मिश्रण प्रस्तुत किया जिसे पर्यटकों, कला प्रेमियों, छात्रों और आम जनता से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली।
आज एक प्रेस विज्ञप्ति में विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि 26 स्टॉल लगाए गए थे जिनमें अद्वितीय हस्तनिर्मित कृतियों का प्रदर्शन किया गया था जिससे आगंतुकों को कुशल कारीगरों से सीधे बातचीत करने, प्रामाणिक शिल्पों का पता लगाने और कारीगरों को प्रत्यक्ष विपणन के लिए एक मंच प्रदान करने का अवसर मिला।
कश्मीर के स्कूल ऑफ डिजाइन्स ने लाइव शिल्प प्रदर्शन आयोजित किए जबकि एक विशेष 'ट्राई कॉर्नर' में मिट्टी के बर्तन बनाने, पेपर-मैशे और कढ़ाई का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया गया। जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी के सहयोग से आयोजित लाइव संगीत ने विरासत के माहौल को और भी निखार दिया।
विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और शिल्प कौशल की गुणवत्ता और बारीकियों से मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने कारीगरों से बातचीत की, प्रदर्शन देखे और शिल्प बनाने में हाथ आजमाया, जिससे उन्हें इसमें शामिल कौशल और सटीकता का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।
प्रवक्ता ने कहा कि इस पहल ने कारीगरों को अपने कौशल का प्रदर्शन करने और पर्यटकों, खरीदारों, छात्रों और आम जनता से सीधे जुड़ने का मंच प्रदान किया। उन्होंने कहा कि अपने कारीगर को जानें' का उद्देश्य कश्मीर के पारंपरिक शिल्पों के विरासत मूल्य, प्रामाणिकता और शिल्प कौशल के बारे में जागरूकता पैदा करना और कारीगर-उपभोक्ता संबंध को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि उत्साहजनक प्रतिक्रिया ने विभाग के इस संकल्प को और मजबूत किया है कि वह इस पहल को प्रमुख पर्यटन स्थलों और अन्य अधिक भीड़भाड़ वाले स्थानों तक ले जाए जिससे कारीगरों को अधिक दृश्यता, पहचान और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित हो सके।
विभाग ने पर्यटकों, खरीदारों और शिल्प प्रेमियों से आग्रह किया कि वे प्रामाणिक उत्पाद खरीदकर और 'वोकल फॉर लोकल' पहल में शामिल होकर कश्मीर के शिल्पकारों का समर्थन करें ताकि क्षेत्र की समृद्ध शिल्प विरासत को संरक्षित और पुनर्जीवित करने में मदद मिल सके
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता