राष्ट्रीय एकता व तिब्बती विरासत संरक्षण पर दिया जोर

 


जम्मू, 30 जून (हि.स.)। भारत तिब्बत सहयोग मंच (बीटीएसएम) के राष्ट्रीय बौद्धिक प्रकोष्ठ के सह-संयोजक तथा जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों के अध्यक्ष डॉ. विवेक शर्मा ने राज्य महासचिव राजिंदर सदोत्रा के साथ लद्दाख का महत्वपूर्ण संगठनात्मक दौरा किया। इस दौरान संगठन के विस्तार, जनसंपर्क बढ़ाने और तिब्बती समुदाय के साथ संवाद को मजबूत करने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।

दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने लद्दाख के स्थानीय पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों के साथ बैठकें कर संगठन की भावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने चोगलामसर और एगलिंग स्थित तिब्बती शरणार्थी बस्तियों का भी दौरा किया जहां तिब्बती समुदाय के लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं, तिब्बती संस्कृति के संरक्षण, भारत-तिब्बत मैत्री और सामाजिक कल्याण से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने लेह स्थित तिब्बती मार्केट का भी दौरा किया और व्यापारियों व स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी गतिविधियों की सराहना की।

इसी बीच डॉ. विवेक शर्मा और राजिंदर सढोत्रा ने लद्दाख विश्वविद्यालय के शिक्षकों के साथ भी बैठक की। बैठक में भारत और तिब्बत के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों, बौद्ध दर्शन, हिमालयी संस्कृति तथा भारत-तिब्बत सभ्यतागत संबंधों पर शोध को बढ़ावा देने सहित शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

प्रतिनिधिमंडल ने लेह में आयोजित सिंधु दर्शन यात्रा के प्रथम महाकुंभ में भी भाग लिया। इस आयोजन में देशभर से आए श्रद्धालुओं, विद्वानों और सामाजिक नेताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में सिंधु नदी के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डाला गया तथा राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता का संदेश दिया गया।

इसी अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता एवं भारत तिब्बत सहयोग मंच के मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार से अलग से संगठनात्मक बैठक भी की। बैठक में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में संगठन की गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने तथा जनभागीदारी बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद डॉ. विवेक शर्मा ने राज्य महासचिव राजिंदर सढोत्रा से विचार-विमर्श कर जम्मू के प्रमुख उद्योगपति अरुण गुप्ता को भारत तिब्बत सहयोग मंच (जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख) का कैशियर मनोनीत किया। संगठन के सदस्यों ने उनके प्रशासनिक अनुभव और कार्यकुशलता पर विश्वास जताते हुए इस नियुक्ति का स्वागत किया।

इस अवसर पर डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि लद्दाख सामरिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। भारत तिब्बत सहयोग मंच के कार्यकर्ताओं को तिब्बत के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने, बौद्ध विरासत के संरक्षण और सामाजिक, सांस्कृतिक व बौद्धिक गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा