डोगरा संस्कृति की झलक बना ‘डुग्गर मेला-2026’, डोगरा सदर सभा ने विरासत को दी नई पहचान, ‘वोकल फॉर लोकल’ को मिला बढ़ावा
जम्मू, 13 अप्रैल (हि.स.)। जम्मू में डोगरा सदर सभा द्वारा आयोजित वार्षिक ‘डुग्गर मेला-2026’ ने डोगरा संस्कृति, परंपरा और पहचान को एक बार फिर जीवंत कर दिया। यह मेला स्वर्गीय ठाकुर गुलचैन सिंह चाढ़क की स्मृति को समर्पित रहा जिन्होंने 14 अप्रैल 1994 (बैसाखी) को इस सांस्कृतिक आंदोलन की शुरुआत की थी ताकि डोगरा कला, लोक संगीत, हस्तशिल्प और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिल सके। कार्यक्रम का आयोजन डोगरा हॉल स्थित सभा भवन में जम्मू और कश्मीर कला, संस्कृति और भाषा अकादमी के सहयोग से किया गया। इस अवसर पर सांसद जी.ए. खटाना मुख्य अतिथि और विधायक युधवीर सेठी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।
डोगरा सदर सभा के पदाधिकारियों ने बताया कि इस मेले को पिछले वर्ष इसके मूल स्वरूप में पुनर्जीवित किया गया ताकि स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को प्रोत्साहन मिल सके। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। सभा के अध्यक्ष कर्नल करण सिंह ने डोगरा संस्कृति के संरक्षण के लिए मुबारक मंडी कॉम्प्लेक्स के जीर्णोद्धार, डुग्गर चैनल की स्थापना और पुरमंडल-उत्तरबेहनी तीर्थों के विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा चलाए जा रहे ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान’ का समर्थन करते हुए लोगों से इसमें भागीदारी की अपील की।
कार्यक्रम में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं जिसमें स्कूल छात्रों के गीत, डोगरा ऑर्केस्ट्रा, पंजाबी प्रस्तुतियां और बच्चों का भांगड़ा शामिल रहा। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पारंपरिक ‘डोगरी धाम’ का आनंद लिया। इस अवसर पर समाज के कई गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने इस सांस्कृतिक आयोजन की सराहना करते हुए इसे डोगरा विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा