डीएसईजे ने जम्मू मंडल के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के साथ-साथ कोचिंग केंद्रों में उपलब्ध सभी पुस्तकालय पुस्तकों की व्यापक समीक्षा का दिया आदेश
जम्मू, 07 जुलाई (हि.स.)। एक नए घटनाक्रम में जम्मू स्कूल शिक्षा निदेशालय (डीएसईजे) ने जम्मू मंडल के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के साथ-साथ कोचिंग केंद्रों में उपलब्ध सभी पुस्तकालय पुस्तकों की व्यापक समीक्षा का आदेश दिया है। यह कदम स्कूलों में पुस्तकालयों के लिए पुस्तकों की स्वीकृति को लेकर हाल ही में हुए विवाद के मद्देनजर उठाया गया है।
जम्मू स्कूल शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी नए परिपत्र के अनुसार सभी संस्थान प्रमुखों (एचओआई) को निर्देश दिया गया है कि वे कक्षाओं, पुस्तकालयों, कार्यालयों और स्टाफ रूम में उपलब्ध प्रत्येक पुस्तक जिसमें हाल ही में खरीदी गई और पुरानी पुस्तकें भी शामिल हैं की जांच करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक या अनुचित सामग्री का उपयोग न हो रहा हो।
परिपत्र में कहा गया है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य ऐसी किसी भी सामग्री की पहचान करना है जो धार्मिक भावनाओं, प्रचलित कानूनों, शैक्षिक मूल्यों या स्थापित मानदंडों का उल्लंघन कर सकती है। सभी पठन सामग्री राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के आयु-उपयुक्त दिशानिर्देशों और उद्देश्यों के अनुरूप होनी चाहिए
डीएसईके ने संबंधित संस्थान को निर्देश दिया है कि वे पाई गई किसी भी आपत्तिजनक सामग्री की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें जिसमें पुस्तक का शीर्षक, लेखक और प्रकाशक के साथ-साथ उपलब्ध प्रतियों की संख्या का उल्लेख हो। परिपत्र के निर्देशों के अनुसार सभी सरकारी और निजी स्कूलों और कोचिंग केंद्रों को संबंधित क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी (जेडईओ) को अनुपालन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है जिसमें यह प्रमाणित किया गया हो कि सभी पुस्तकों की पूरी तरह से जांच की गई है, परिसर में कोई आपत्तिजनक सामग्री मौजूद नहीं है और पुस्तकालय की पुस्तकें एनईपी 2020 के दिशानिर्देशों के अनुरूप हैं।
इसमें लिखा है कि आपत्तिजनक सामग्री की पहचान करने वाले संस्थानों को प्रमाण पत्र के साथ एक विस्तृत रिपोर्ट संलग्न करनी होगी। शिक्षा एवं शिक्षा मंत्रालय (डीएसईजे) ने इस प्रक्रिया के लिए समयसीमा निर्धारित कर दी है और विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे जहां भी आवश्यक हो, 13 जुलाई तक जीईओ को रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
वहीं जीईओ को इन रिपोर्टों की जांच करने और 15 जुलाई तक संबंधित मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीईओ) को समेकित रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है। डीएसईजे के परिपत्र में कहा गया है कि संबंधित जीईओ से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सीईओ को 17 जुलाई तक निदेशालय को प्रमाणित रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। निदेशालय ने सीईओ को प्रक्रिया की निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी सौंपी है। साथ ही संयुक्त निदेशक (जेएसके) रेंज और संयुक्त निदेशक (प्राथमिक शिक्षा) की एक समिति को जिलावार रिपोर्ट एकत्र करने और निदेशक को अंतिम समेकित रिपोर्ट प्रस्तुत करने का कार्य सौंपा गया है।
निदेशालय ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा है कि निर्देशों के कार्यान्वयन में किसी भी प्रकार की चूक को गंभीरता से लिया जाएगा और दोषी अधिकारियों के खिलाफ लागू नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता