प्राथमिक उपचार बचाव कार्य और आपात स्थिति से निपटने के तरीकों की दी जानकारी
कठुआ, 28 अक्टूबर (हि.स.)। कॉलेज में आयोजित पांच दिवसीय सिविल डिफेंस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन विद्यार्थियों को प्राथमिक उपचार, आपदा प्रबंधन और आपात परिस्थितियों में स्वयंसेवकों की भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को आपदा के समय धैर्य बनाए रखने, स्थिति का आकलन करने, अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रभावित लोगों की सहायता करने के व्यावहारिक तरीके समझाए
एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस विभाग के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बताया कि आपात स्थिति में प्रशिक्षित स्वयंसेवक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आपदा से पहले जागरूकता एवं तैयारी, आपदा के दौरान सुरक्षित निकासी और बचाव कार्यों में सहयोग तथा आपदा के बाद राहत वितरण और पुनर्वास जैसी गतिविधियों में स्वयंसेवकों की भागीदारी बेहद अहम है। विशेषज्ञों ने टीम भावना, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आपदा के समय एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के साथ बेहतर तालमेल स्थापित कर राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। साथ ही, स्वयंसेवकों को दूसरों की सहायता करते समय अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने की सलाह दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज की प्राचार्य प्रो. (डॉ.) अनुपमा गुप्ता के समग्र मार्गदर्शन में किया गया। उन्होंने एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस के विशेषज्ञों के प्रयासों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में जागरूकता, पूर्व तैयारी और समय पर कार्रवाई की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। विद्यार्थी जिम्मेदार नागरिक के रूप में संकट की घड़ी में समाज की सहायता करने में अहम योगदान दे सकते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया