ज्येष्ठ पूर्णिमा पर जम्मू के मंदिरों में विशेष पूजा की तैयारियां, अधिकमास की पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं में उत्साह, दान-पुण्य और सत्यनारायण कथा का रहेगा विशेष महत्व
जम्मू, 28 मई (हि.स.)। सनातन धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है और इस वर्ष अधिकमास में पड़ रही ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को लेकर जम्मू के मंदिरों और धार्मिक स्थलों में विशेष तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर के विभिन्न मंदिरों में भगवान विष्णु के स्वरूप श्री सत्यनारायण भगवान की पूजा, कथा एवं भजन-कीर्तन के आयोजन किए जाएंगे। श्रद्धालुओं में भी इस पावन पर्व को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है।
महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि अधिकमास में आने वाली यह पूर्णिमा अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। उन्होंने कहा कि इस दिन भगवान श्रीहरि, भगवान शिव, माता पार्वती, श्रीगणेश और चंद्रदेव की पूजा का विशेष महत्व है। उन्होंने जानकारी दी कि ज्येष्ठ (अधिक) शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि 30 मई शनिवार प्रातः 11 बजकर 58 मिनट से प्रारंभ होकर 31 मई रविवार दोपहर 2 बजकर 15 मिनट तक रहेगी।
उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु रात्रि में पूर्णिमा व्रत एवं पूजन करते हैं, वे 30 मई शनिवार को व्रत रख सकते हैं, जबकि दिवा काल में व्रत करने वाले श्रद्धालु 31 मई रविवार को पूजा-अर्चना कर सकते हैं। उदया तिथि के अनुसार 31 मई को स्नान-दान का विशेष पुण्य प्राप्त होगा। जम्मू के धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों द्वारा श्रद्धालुओं से सात्विक जीवनचर्या अपनाने, नशे एवं तामसिक भोजन से दूर रहने तथा जरूरतमंदों की सहायता करने की अपील भी की जा रही है। मंदिरों में दान-पुण्य, अन्न वितरण और विशेष आरती के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि पूर्णिमा के दिन जल से भरा घड़ा, अन्न, वस्त्र और सामर्थ्य अनुसार दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। रात्रि में चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करने तथा जरूरतमंदों को भोजन करवाने से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। उन्होंने आर्थिक समृद्धि के लिए एक विशेष उपाय बताते हुए कहा कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी के समक्ष 11 कौड़ियां अर्पित कर उन पर हल्दी का तिलक लगाएं तथा अगले दिन उन्हें लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से धन-समृद्धि में वृद्धि होने की मान्यता है।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा