पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर से विस्थापित पहाड़ी परिवारों को एसटी-2 प्रमाणपत्र देने की मांग
जम्मू, 08 अक्टूबर (हि.स.)। वर्ष 1947 में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर से विस्थापित लोगों के पुनर्वास और अधिकारों के लिए काम कर रही जम्मू-कश्मीर शरणार्थी एक्शन कमेटी (जेकेएसएसी) ने राजौरी और पुंछ के अलावा अन्य जिलों में बसे पात्र पहाड़ी भाषी विस्थापितों को एसटी-2 श्रेणी के प्रमाणपत्र जारी करने की मांग दोहराई है। जम्मू में आयोजित संगठन की बैठक में जेकेएसएसी ने गृह मामलों पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट संख्या 183 को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लागू करने की भी मांग की।
जेकेएसएसी अध्यक्ष गुरदेव सिंह ने जम्मू, कठुआ, सांबा, ऊधमपुर और अन्य जिलों में रहने वाले पात्र पहाड़ी भाषी युवाओं को एसटी-2 प्रमाणपत्र जारी करने में कथित प्रशासनिक देरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 8 अप्रैल 2025 को विधानसभा में समाज कल्याण मंत्री द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण और हाल के शरदकालीन विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री द्वारा इस रुख का समर्थन किए जाने के बाद स्थिति स्पष्ट हो चुकी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पात्र आवेदकों को प्रमाणपत्र जारी करने के लिए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देने की अपील की।
गुरदेव सिंह ने कहा कि 1947 के विस्थापन के बाद पहाड़ी भाषी परिवारों ने अपनी जिंदगी दोबारा बसाने के साथ अपनी सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को भी बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि संविधान (जम्मू-कश्मीर) अनुसूचित जनजाति आदेश संशोधन अधिनियम, 2024 के तहत पहाड़ी जातीय समूह को मान्यता मिलने के बावजूद पात्र विस्थापित परिवार प्रमाणपत्र को लेकर असमंजस का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विस्थापन के कारण किसी समुदाय की सदियों पुरानी सांस्कृतिक और भाषाई पहचान समाप्त नहीं हो जाती। जेकेएसएसी ने प्रशासन से पात्र आवेदकों को अनावश्यक औपचारिकताओं और देरी से राहत देने की मांग की।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा