1987 के चुनाव में धांधली के प्रस्ताव पर पूर्ण चुप्पी जबकि बिजली शुल्क वृद्धि के प्रस्ताव को स्वीकार किया गया-साजिद लोन
श्रीनगर, 17 सितंबर (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और विधायक सज्जाद लोन ने 1987 के विधानसभा चुनावों में कथित धांधली से संबंधित अपने प्रस्ताव पर कोई सूचना न मिलने पर जम्मू और कश्मीर विधानसभा सचिवालय से सवाल किया है।
एक्स पर एक पोस्ट में सज्जाद लोन ने लिखा कि मैंने आगामी शरदकालीन सत्र के लिए दो प्रस्तावों का नोटिस दिया था। विधानसभा सचिवालय ने मुझे सूचित किया है कि बिजली दरों में हालिया वृद्धि के खिलाफ मेरा प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है लेकिन जम्मू और कश्मीर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना से संबंधित दूसरे प्रस्ताव पर चुप्पी है। 1987 के चुनावों में धांधली से संबंधित मेरे प्रस्ताव पर पूरी तरह से चुप्पी है।
उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर विधानसभा डाकघर की तरह काम नहीं कर सकती जो सुविधाजनक पत्र तो भेज दे लेकिन असुविधाजनक पत्रों को छुपा दे। विधानसभा सरकार समर्थक कूरियर एजेंसी की तरह व्यवहार नहीं कर सकती। यह सभी विधायकों के अधिकारों और जम्मू और कश्मीर की जनता द्वारा हम पर जताए गए विश्वास की संरक्षक है। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार विधानसभा सचिवालय को विधायकों को यह सूचित करना अनिवार्य है कि उनके प्रस्ताव स्वीकार किए गए हैं, अस्वीकार किए गए हैं या अध्यक्ष द्वारा संशोधित रूप में स्वीकार किए गए हैं।
लोन ने जम्मू और कश्मीर विधानसभा की कार्य प्रक्रिया एवं संचालन नियमों के नियम 179 का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि सचिव किसी सदस्य को सूचित करेगा कि उसका प्रस्ताव स्वीकार किया गया है, अस्वीकार किया गया है या अध्यक्ष द्वारा संशोधित रूप में स्वीकार किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि विधानसभा प्रस्तावों के बारे में जानकारी छिपा नहीं सकती क्योंकि संबंधित नियम में “अनिवार्य” शब्द का प्रयोग किया गया है। प्रस्ताव की स्थिति के बारे में मुझे सूचित करना उनके लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी है। सूचना न देना नियमों का उल्लंघन होगा। मैंने इस मुद्दे पर विधानसभा सचिवालय को पत्र लिखा है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता