धर्मगुरु मसरूर अब्बास अंसारी ने श्रीनगर में 8वें मुहर्रम के जुलूस को बताया 'मानवता का संदेश'
श्रीनगर, 24 जून (हि.स.)। शिया धर्मगुरु मसरूर अब्बास अंसारी ने बुधवार को श्रीनगर में 8वें मुहर्रम के जुलूस को 'मानवता का संदेश' बताया। उन्होंने 35 वर्षों के बाद जुलूस निकालने की अनुमति देने के लिए प्रशासन का आभार व्यक्त किया और आशूरा रैली के लिए भी अनुमति मिलने की उम्मीद जताई।
अंसारी ने मीडिया को बताया कि अभिगुदर से शुरू होकर डल गेट पर समाप्त होने वाले 8वें मुहर्रम का जुलूस का ऐतिहासिक महत्व है। धर्मगुरु ने कहा कि जुलूस पर तीन दशकों से अधिक समय से प्रतिबंध लगा हुआ था। उन्होंने कहा कि स्थानीय सरकारी प्रशासन ने हमें यह जुलूस निकालने की अनुमति दी है। हम उनके आभारी हैं। अंसारी ने कहा कि यह जुलूस 'एकता, शांति, सुरक्षा और मानवता' का संदेश देता है। उन्होंने आगे कहा कि इमाम हुसैन जिस उद्देश्य से कर्बला गए थे वह मानवता और समाज की सफलता थी - अत्याचार से लड़ना और अधिकारों की रक्षा करना।
इमाम हुसैन की अपील को सार्वभौमिक बताते हुए अंसारी ने कहा कि इमाम हुसैन केवल शियाओं या मुसलमानों के लिए ही शहीद नहीं हैं, बल्कि पूरी मानवता के लिए शहीद हैं।उनका संदेश सभी के लिए है। 10वें मुहर्रम के जुलूस के अवसर पर अंसारी ने प्रशासन से एक साहसिक कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि 35 वर्षों से नौकरशाही के दबाव के कारण सरकारें ऐसा नहीं कर पाईं। इस प्रशासन में साहस और शक्ति है। उन्होंने आशूरा जुलूस को उसके पारंपरिक मार्ग से ज़ादिबल में समाप्त करने की अनुमति देने का आह्वान किया, यह कहते हुए कि इससे संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता का शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से पालन संभव हो सकेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता