मुख्य सचिव ने केंद्र शासित प्रदेश स्तर के परियोजना निगरानी समूह के ढांचे की समीक्षा की

 

जम्मू , 11 सितंबर (हि.स.)।मुख्य

जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय परियोजना निगरानी समूह की

तर्ज पर एक समर्पित परियोजना निगरानी समूह (जेके-पीएमजी) स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य विशाल विकास परियोजनाओं की उच्च स्तरीय निगरानी सुनिश्चित करना और उनके क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं का सुचारू और समन्वित समाधान करना है।

केंद्र शासित प्रदेश में राष्ट्रीय तंत्र को लागू करने के लिए संस्थागत ढांचा राष्ट्रीय पीएमजी के प्रतिनिधियों द्वारा मुख्य सचिव अटल दुल्लू के समक्ष प्रस्तुत किया गया। प्रस्तावित प्रणाली का उद्देश्य परियोजना निरीक्षण को मजबूत करना, अंतर-विभागीय समन्वय में सुधार करना और भूमि अधिग्रहण, वैधानिक स्वीकृतियों, निर्माण अनुमोदनों और अन्य कार्यान्वयन संबंधी मुद्दों में समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है।

मुख्य सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि हमें आवधिक स्थिति रिपोर्टिंग से हटकर वास्तविक समय, मील के पत्थर पर आधारित परियोजना निगरानी की ओर बढ़ने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह व्यापक डिजिटल मंच हमें प्रगति पर नजर रखने, महत्वपूर्ण कमियों की पहचान करने और विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि एक स्पष्ट रूप से परिभाषित समस्या निवारण ढांचा यह सुनिश्चित करेगा कि मुद्दों को उस स्तर पर संबोधित किया जाए जहां उनका समाधान संभव हो जबकि उच्च स्तरीय हस्तक्षेप की आवश्यकता वाले मामलों को अनावश्यक देरी के बिना उठाया जाए। उन्होंने सराहना की कि इससे प्रशासनिक तत्परता और परियोजना जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी।

मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय पीएमजी टीम को स्थानीय हितधारकों के लिए अतिरिक्त क्षमता-निर्माण सत्र आयोजित करने पर भी जोर दिया ताकि वे प्रणाली, इसकी कार्यप्रणाली और समस्या निवारण तंत्र से पूरी तरह परिचित हों और यहां इसके संचालन को कुशलतापूर्वक संभालने के लिए पर्याप्त रूप से सुसज्जित हों।

इस निगरानी समूह के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आयुक्त सचिव पीडी एंड एमडी आर. एलिस वाज़ ने बताया कि वर्तमान में राष्ट्रीय पीएमजी जम्मू-कश्मीर में 61 परियोजनाओं की निगरानी कर रहा है जिनमें 3.91 लाख करोड़ का निवेश शामिल है और राष्ट्रीय पीएमजी पोर्टल के माध्यम से वर्तमान में 130 सक्रिय मुद्दे समीक्षाधीन हैं।

उन्होंने आगे कहा कि प्रस्तावित जम्मू-कश्मीर पीएमजी मुख्य सचिव के समग्र पर्यवेक्षण में कार्य करेगा जिसमें परियोजना विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम और दैनिक संचालन और समन्वय के लिए जिम्मेदार एक नामित प्रशासनिक विभाग होगा।

यह समूह चिन्हित मेगा और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण परियोजनाओं की निगरानी करेगा, महत्वपूर्ण पड़ावों और लंबित स्वीकृतियों पर नज़र रखेगा, साथ ही कार्यान्वयन एजेंसियों और जिला प्रशासनों के बीच समन्वय को सुगम बनाएगा और अनसुलझे मुद्दों को उचित हस्तक्षेप के लिए आगे बढ़ाएगा।

इस ढांचे में एक संरचित समीक्षा तंत्र की परिकल्पना की गई है जिसमें प्रशासनिक सचिवों/विभागाध्यक्षों द्वारा पाक्षिक विभागीय समीक्षा, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में मासिक समीक्षा और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सर्वोच्च सरकारी स्तर पर समीक्षा शामिल है जो ऐसे मामलों पर विचार करने के लिए आवश्यक हैं। यह क्रमिक व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि परियोजना संबंधी मुद्दों की उचित स्तर पर जांच की जाए और जहां आवश्यक हो, उन्हें आगे बढ़ाया जाए।

टीम ने यह प्रदर्शित किया कि प्रस्तावित जम्मू-कश्मीर पीएमजी स्वचालित रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक क्षमताओं वाले एक डिजिटल, निःशुल्क पोर्टल का उपयोग करेगा। परिकल्पित कार्यप्रवाह के तहत, परियोजना प्रस्तावक परियोजनाओं और बाधाओं को पंजीकृत करेंगे, प्रायोजक विभाग मुद्दों का सत्यापन करेंगे और संबंधित जिला प्रशासन या विभाग उनके समाधान के लिए कार्रवाई करेंगे। गंभीर अनसुलझे मामलों को संबंधित हितधारकों को शामिल करते हुए उच्च मंचों पर भेजा जाएगा ताकि मुद्दों का तत्काल समाधान हो सके।

बाद में राष्ट्रीय पीएमजी टीम ने योजना विभाग के अधिकारियों और अन्य संबंधित हितधारकों के लिए एक जागरूकता कार्यशाला आयोजित की जिसमें उन्हें प्रस्तावित जम्मू-कश्मीर पीएमजी की कार्यप्रणाली, संस्थागत संरचना, डिजिटल कार्यप्रवाह और समस्या निवारण तंत्र से अवगत कराया गया। कार्यशाला में परियोजना से संबंधित बाधाओं की पहचान करने, उन पर नज़र रखने और उनका समाधान करने में विभिन्न हितधारकों की भूमिकाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया, साथ ही केंद्र शासित प्रदेश में इसके सुचारू कार्यान्वयन के लिए आवश्यक परिचालन प्रक्रियाओं की एक सामान्य समझ विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता