सीएस अटल डुल्लू ने जम्मू कश्मीर में नेशनल वॉटरवेज़ की ऑपरेशनल तैयारी का लिया जायज़ा

 


श्रीनगर, 8 अक्टूबर(हि.स.)। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने आज जम्मू-कश्मीर में नेशनल वॉटरवेज़ के विकास और उन्हें चालू करने की तैयारियों का जायज़ा लिया। उन्होंने इंडियन पोर्टरेल एंड रोपवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा विकसित किए जा रहे ऑनशोर इंफ्रास्ट्रक्चर और इनलैंड वॉटरवेज़ अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया द्वारा तैयार किए जा रहे नदी इकोसिस्टम और नेविगेशन सुविधाओं का विस्तृत ब्यौरा लिया।

इस बैठक में एसीएस, पीडब्ल्यूडी और आईडब्ल्यूएआई की चेयरपर्सन के अलावा संबंधित डिविज़नल कमिश्नर, ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी, जीजीएम, आईपीआरसीएल और संबंधित विभागों व एजेंसियों के कई अन्य अधिकारी शामिल हुए।

मुख्य सचिव ने डिविज़नल कमिश्नरों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने डिविज़नों में नेशनल वॉटरवे प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समय-समय पर समीक्षा करें और समस्याओं के तेज़ी से समाधान और काम को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए कभी-कभी साइट का दौरा भी करें।

उन्होंने देखा कि प्रोजेक्ट्स के सामने आ रही ज़्यादातर समस्याएं छोटी और सुलझाने योग्य हैं और संबंधित डिविज़नल प्रशासन को काम करने वाली एजेंसियों के साथ मिलकर इनका तुरंत समाधान करना चाहिए।

डुल्लू ने नेशनल वॉटरवेज़ से पर्यटन और शहरी आवाजाही की संभावनाओं पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि रिवर क्रूज़ पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण बन सकते हैं और साथ ही भीड़-भाड़ वाले शहरी इलाकों में परिवहन का एक वैकल्पिक साधन भी प्रदान कर सकते हैं।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वॉटरवेज़ के विकास की योजना इस तरह बनाई जानी चाहिए कि नदी-आधारित पर्यटन को बढ़ावा मिले, यात्रियों की आवाजाही आसान हो और सड़क नेटवर्क पर दबाव कम हो, साथ ही पर्यटकों और यात्रियों दोनों के लिए एक सुरक्षित, आकर्षक और टिकाऊ अनुभव सुनिश्चित हो।

उन्होंने आईपीआरसीएल और आईडब्ल्यूएआई से कहा कि वे तय समय-सीमा के अंदर सख्ती से काम करें और पक्का करें कि ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, नेविगेशन सुविधाएँ और नदी का इकोसिस्टम तैयार हो ताकि अगले साल तक वॉटरवे आम लोगों के इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाएँ।

आईडब्ल्यूएआई के चेयरपर्सन सुशील कुमार लोहानी ने मीटिंग में बताया कि तीन बड़े नेशनल वॉटरवे -झेलम ( एन डब्ल्यू-49), चिनाब (एन डब्ल्यू-26) और रावी (एन डब्ल्यू-84) - को 2026-27 फाइनेंशियल ईयर में चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि झेलम नेशनल वॉटरवे अनंतनाग में संगम ब्रिज से वुलर झील तक 110 किलोमीटर लंबा है, चिनाब वॉटरवे रियासी और अखनूर के बीच 53 किलोमीटर का है जबकि रावी वॉटरवे चमेरा डैम से बसोली में रंजीत सागर डैम तक 44 किलोमीटर लंबा है। चीफ़ सेक्रेटरी को एनडब्ल्यू-49 (झेलम) पर हुई काफ़ी प्रगति के बारे में बताया गया जहाँ संगम से वुलर झील तक 106 किलोमीटर का रिवर क्रूज़ रूट प्रस्तावित है। इसमें पंथा चौक ,ज़ीरो ब्रिज, अमीरा कदल, महाराजगंज, छत्ताबल, सुंबल और गुंड प्रांग जैसी अहम जगहें शामिल हैं।

इसके अलावा यह भी बताया गया कि 66.11 करोड़ की लागत से 10 हाइब्रिड इलेक्ट्रिक कैटामरन (हर एक में 20 यात्रियों की क्षमता) के लिए वर्क ऑर्डर जारी किया गया है। जहाज़ के डिज़ाइन मंज़ूर हो चुके हैं और निर्माण का काम चल रहा है। मार्च 2027 तक इनकी डिलीवरी का लक्ष्य रखा गया है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता