18% किराया बढ़ोतरी पर भाजपा ने उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय राष्ट्रीय सरकार की कड़ी आलोचना की
जम्मू, 07 मार्च (हि.स.)।
जम्मू-कश्मीर में आंदोलन की चेतावनी दी जम्मू-कश्मीर के त्रिकुटा नगर स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा ने उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय परिषद सरकार द्वारा हाल ही में किए गए 18% किराया बढ़ोतरी की कड़ी आलोचना करते हुए इस फैसले को तर्कहीन और जनविरोधी बताया। पार्टी नेताओं ने कहा कि किराया में भारी बढ़ोतरी करके आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय, सरकार को ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेना चाहिए जिससे ट्रांसपोर्टरों को राहत मिलेगी और नागरिकों को और अधिक वित्तीय संकट से बचाया जा सकेगा।
मीडिया को संबोधित करते हुए डॉ. अभिजीत जसरोटिया ने कहा कि उमर अब्दुल्ला सरकार द्वारा किराया वृद्धि अतार्किक, असंवेदनशील और 2024 के चुनाव घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर की जनता से किए गए वादों का सीधा उल्लंघन है। डॉ. अभिजीत ने कहा कि जनता को राहत देने के बजाय सरकार ने पहले से ही संघर्षरत आम आदमी पर बोझ डालना चुना है जिसका असर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि परिवहन किराया बढ़ने पर वस्तुओं और दैनिक आवश्यकताओं की लागत स्वतः बढ़ जाती है जिससे आम नागरिक और अधिक आर्थिक संकट में फंस जाता है। उन्होंने बताया कि छात्र, दिहाड़ी मजदूर, श्रमिक और सीमित एवं कम आय वाले परिवार सबसे अधिक प्रभावित होंगे क्योंकि वे अपनी दैनिक जरूरतों के लिए सार्वजनिक परिवहन पर बहुत अधिक निर्भर हैं।
उन्होंने आगे कहा कि यह निर्णय घरेलू अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित करेगा और आम परिवारों के रसोई बजट को बिगाड़ देगा क्योंकि किराए में वृद्धि के कारण हर चीज की कीमतें सीधे आसमान छू जाएंगी जिससे सरकार की जनविरोधी मानसिकता उजागर होती है। डॉ. अभिजीत ने आगे कहा कि यदि सरकार वास्तव में ट्रांसपोर्टरों और आम जनता की कठिनाइयों को लेकर चिंतित है, तो उसे ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, न कि किराए में भारी वृद्धि करके जनता पर बोझ डालना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से ट्रांसपोर्टरों को राहत मिलेगी और साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि आम नागरिकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े।
युद्धवीर सेठी ने अपने संबोधन में इस वृद्धि को लागू करने के पीछे के तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार पिछले डेढ़ साल में ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों से पहले ही भारी राजस्व एकत्र कर चुकी है तो जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने का कोई औचित्य नहीं है। आंकड़े प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले साल ईंधन की कीमतों में वृद्धि से लगभग 1675 करोड़ रुपये का राजस्व एकत्र किया जबकि वह इसी माध्यम से हर महीने लगभग 140 करोड़ रुपये कमा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता