भाजपा नेताओं ने कृत्रिम बर्फ लगाने के प्रयासों की आलोचना की, घाटी के खतरे के क्षेत्र में पहुंचने पर चिनार वृक्षारोपण अभियान चलाने का आह्वान किया

 

श्रीनगर, 24 फ़रवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार पर पर्यावरण संरक्षण के प्रति पूर्ण निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए तीखा हमला किया। पार्टी प्रवक्ता डॉ. अभिजीत जसरोटिया ने आरोप लगाया कि कश्मीर खतरनाक गति से गर्म हो रहा है। जम्मू-कश्मीर भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर और मंजूर भट के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए जसरोटिया ने दावा किया कि कश्मीर का तापमान सामान्य से लगभग 2.5 डिग्री अधिक बढ़ रहा है - जो वैश्विक तापमान वृद्धि दर लगभग 1.5 डिग्री से काफी अधिक है - जिससे घाटी खतरे के क्षेत्र में आ गई है।

ऐसे समय में जब हमें व्यापक हरियाली और वन संरक्षण की आवश्यकता है, मुख्यमंत्री कृत्रिम बर्फ और कृत्रिम शीतलन की बात कर रहे हैं। ये दिखावटी उपाय हैं और खेल प्रेमियों तथा नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए संभावित रूप से खतरनाक हैं,” जसरोटिया ने कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले डेढ़ वर्षों में उमर सरकार क्षेत्र के हरित आवरण की रक्षा करने में विफल रही है। विकास के नाम पर पेड़ काटे जा रहे हैं लेकिन जो नष्ट हो रहा है उसे बहाल करने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया जा रहा है। हम धीरे-धीरे अपनी प्राकृतिक शीतलन ढाल खो रहे हैं,” उन्होंने आगे कहा। जसरोटिया ने सरकार पर स्पष्ट जलवायु कार्रवाई रणनीति का अभाव और “पर्यावरण संरक्षण की बजाय जनसंपर्क गतिविधियों” को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि अनियंत्रित शहरी विस्तार, सड़क चौड़ीकरण परियोजनाएं और सिकुड़ते बाग पारिस्थितिक असंतुलन में योगदान दे रहे हैं। प्रशासन को राजनीतिक रूप से निशाना बनाते हुए उन्होंने टिप्पणी की, “कश्मीर के जंगलों और आर्द्रभूमि की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने के बजाय सरकार सत्ता में बने रहने से संतुष्ट दिखती है।” भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि 2019-2023 के बीच इस क्षेत्र में वन क्षेत्र में पहली बार कुछ सुधार हुआ। इतना ही नहीं इस दौरान वन विभाग ने 4-चिनार वन क्षेत्र को पुनर्स्थापित किया और बाद में इसे उद्यान एवं पार्क विभाग को वापस सौंप दिया। डॉ. जसरोतिया ने कहा कि इसके बाद वर्तमान राष्ट्रीय राष्ट्रीय सरकार के तहत स्थिति फिर से बिगड़ गई है। अब वनों की कटाई, आर्द्रभूमि का क्षरण और अनियंत्रित निर्माण एक बार फिर बढ़ गया है, जिससे लू की स्थिति और खराब हो सकती है हिमपात कम हो सकता है और पर्यटन एवं बागवानी पर असर पड़ सकता है। अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि पर्यावरण का क्षरण पहले से ही आजीविका को प्रभावित कर रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता