जम्मू-कश्मीर में बड़े भ्रष्टाचार मामलों पर कार्रवाई न होने को लेकर एक्टिविस्ट बलविंदर सिंह ने उठाए सवाल
जम्मू,, 31 अक्टूबर (हि.स.)।
जम्मू-कश्मीर में भ्रष्टाचार के बड़े मामलों की जांच और कार्रवाई को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट बलविंदर सिंह ने एंटी करप्शन ब्यूरो यानी एसीबी और सीबीआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हो रही जबकि छोटे मामलों में कार्रवाई दिखाई देती है। बलविंदर सिंह ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए में तुरंत संशोधन करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस प्रावधान का इस्तेमाल कई बार अधिकारियों को जांच से बचाने के लिए किया जाता है जिससे बड़े भ्रष्टाचार के मामलों में निष्पक्ष जांच प्रभावित होती है।
बलविंदर सिंह के साथ सामाजिक कार्यकर्ता मंजीत सिंह, राजिंदर सिंह, जसबीर सिंह, सतिंदर पाल सिंह, अनिल शर्मा, मनमोहन सिंह और सतिंदर सिंह ने भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि जब भी वे करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेजों और सबूतों के साथ एंटी करप्शन ब्यूरो से संपर्क करते हैंतो अक्सर धारा 17ए का हवाला देकर जांच में रुकावट की बात सामने आती है।
बलविंदर सिंह ने सवाल उठाया कि अगर किसी भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी के सामने दस्तावेजों के साथ गंभीर शिकायत रखी जाती है और फिर भी जांच आगे नहीं बढ़ पाती है तो ऐसी एजेंसी का उद्देश्य क्या रह जाता है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बनाई गई संस्थाओं को हर विश्वसनीय शिकायत की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि धारा 17ए में जरूरी संशोधन किया जाए ताकि गंभीर आरोपों की जांच में आने वाली कानूनी रुकावटों को दूर किया जा सके।
उन्होंने दावा किया कि 27 जनवरी 2026 को उन्होंने जम्मू में सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच के पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया था। इस दौरान उन्होंने सरकारी खरीद से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में एफआईअर दर्ज करने और विस्तृत जांच करवाने की मांग की थी। लेकिन उनका आरोप है कि उनकी शिकायत को बिना किसी स्पष्ट कारण या लिखित आदेश के निपटा दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्पष्टीकरण मांगने पर उन्हें ट्रैप केस लाने की सलाह दी गई।
इस पर बलविंदर सिंह ने सवाल उठाया कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई अब केवल रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने वाले मामलों तक सीमित रह गई है। उन्होंने कहा कि अगर सरकारी खरीद में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज मौजूद हों तो उनकी भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उनके मुताबिक भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों को अलग-अलग प्रकार के भ्रष्टाचार के मामलों में एक समान और पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
बलविंदर सिंह ने कहा कि अगर किसी नागरिक की दस्तावेजों पर आधारित शिकायत को बिना स्पष्ट कारण बताए बंद कर दिया जाता है तो इससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठते हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और शिकायतकर्ताओं को उचित जानकारी दी जाए।
उन्होंने सरकार से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए की समीक्षा करने और भ्रष्टाचार विरोधी संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने की अपील की। हालांकि बलविंदर सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों पर एसीबी और सीबीआई का आधिकारिक पक्ष इस प्रेस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है और कथित भ्रष्टाचार या शिकायतों के निपटारे से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता