जम्मू-कश्मीर सीमा क्षेत्र विकास सम्मेलन ने पुंछ में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की मांग की
जम्मू, 17 जनवरी (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर में प्रस्तावित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) के स्थान को लेकर चल रहे विवाद के बीच जम्मू-कश्मीर सीमा क्षेत्र विकास सम्मेलन (जेके-बीएडीसी) ने उच्च शिक्षा में सीमावर्ती जिलों को प्राथमिकता दिए जाने के संदर्भ में विश्वविद्यालय की स्थापना पुंछ में करने की मांग की है।
जेके-बीएडीसी के अध्यक्ष और पूर्व कुलपति डॉ. शहजाद अहमद मलिक ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय स्वागत योग्य कदम है। हालांकि उन्होंने कहा कि पुंछ जैसे सीमावर्ती जिले में विश्वविद्यालय की स्थापना से निष्पक्ष और संतुलित विकास सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित होने, दुर्गम भूभाग और बार-बार होने वाले संघर्ष विराम उल्लंघन के कारण पुंछ कई वर्षों से पिछड़ा हुआ है।
मडॉ. शहजाद ने कहा कि पुंछ में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना से सीमावर्ती और आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों को लाभ होगा और साथ ही रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे में सुधार और क्षेत्र में कानूनी जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
जम्मू-कश्मीर जिला परिषद (जेकेबीएडीसी) के अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय संस्थानों को केवल विकसित शहरों में केंद्रित करना संतुलित विकास के सिद्धांत के विरुद्ध है। उन्होंने आगे कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के सात दशकों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुंछ जिले में एक भी विश्वविद्यालय नहीं है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता