एसीबी ने ज़ावूरा गार्डन मामले में पूर्व बागवानी अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज किया
श्रीनगर, 05 जून (हि.स.)।भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) ने श्रीनगर के ज़ावूरा गार्डन में किए गए विकास कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं और प्रक्रियागत उल्लंघनों के आरोप में बागवानी विभाग के पूर्व अधिकारियों, समिति सदस्यों और एक निजी ठेकेदार के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है।
अधिकारियों ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि जावूरा गार्डन में बागवानी विभाग द्वारा किए गए कार्यों से संबंधित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं, प्रक्रियागत उल्लंघनों और पद के दुरुपयोग के आरोपों की संयुक्त जांच के बाद मामला दर्ज किया गया।
बयान में कहा गया है कि ज़ावूरा गार्डन में उत्कृष्टता केंद्र के विकास से संबंधित आरोपों की जांच के लिए श्रीनगर एसीबी पुलिस स्टेशन द्वारा संयुक्त जांच शुरू की गई थी। जांच में परियोजना के तहत किए गए कार्यों की निविदा और निष्पादन में गंभीर अनियमितताओं के प्रथम दृष्टया सबूत मिले हैं।
जांच के दौरान यह सामने आया कि एनआईटी (निविदा सूचना) कथित तौर पर इस तरह से तैयार की गई थी जिसमें विशिष्ट गुणवत्ता मापदंड और तकनीकी विनिर्देशों का अभाव था जिससे मनमाने ढंग से निर्णय लेने की गुंजाइश बनी। यह भी पाया गया कि निविदा में शामिल वित्तीय प्रावधान स्वीकृत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में परिकल्पित प्रावधानों से काफी अधिक थे।
जांच में यह भी पता चला कि वित्तीय कारोबार से संबंधित पात्रता मानदंड कथित तौर पर असामान्य रूप से उच्च सीमा पर निर्धारित किए गए थे जबकि वास्तविक आवश्यकता काफी कम थी। बयान में कहा गया है कि इस प्रतिबंधात्मक शर्त ने कथित तौर पर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बाधित किया और एक विशेष बोलीदाता को लाभ पहुंचाया।
समिति (डीएलपीसी) के सदस्यों, निरीक्षण समिति के सदस्यों, लाभार्थी ठेकेदार मेसर्स फ्रूट मास्टर एग्रो फ्रेश प्राइवेट लिमिटेड और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस स्टेशन एसीबी श्रीनगर में एफआईआर संख्या 09/2026 दर्ज की गई ।
उन्होंने आगे कहा कि सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और संलिप्तता का पता लगाने और कानून के अनुसार उचित कानूनी कार्रवाई करने के लिए आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
प्रवक्ता ने कहा कि संयुक्त त्वरित जांच के निष्कर्ष प्रथम दृष्टया सरकारी पद के दुरुपयोग, आपराधिक कदाचार और लोक सेवकों और लाभार्थी निजी फर्म की मिलीभगत से आपराधिक साजिश का संकेत देते हैं जिसके परिणामस्वरूप ठेकेदार को अनुचित आर्थिक लाभ और सरकार को तदनुसार नुकसान हुआ।
तदनुसार, जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सं. 2006 की धारा 5(1)(डी) और धारा 5(2) के तहत तथा आरपीसी की धारा 120-बी के तहत तत्कालीन निदेशक बागवानी कश्मीर, जिला स्तरीय क्रय समिति (डीएलपीसी) के सदस्यों, निरीक्षण समिति के सदस्यों, लाभार्थी ठेकेदार मेसर्स फ्रूट मास्टर एग्रो फ्रेश प्राइवेट लिमिटेड और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस स्टेशन एसीबी श्रीनगर में एफआईआर संख्या 09/2026 दर्ज की गई है।
उन्होंने आगे कहा कि सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और संलिप्तता का पता लगाने और कानून के अनुसार उचित कानूनी कार्रवाई करने के लिए आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह