एसीबी ने एनओसी रिश्वत मामले में फायर सर्विस अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

 

श्रीनगर, 19 जून (हि.स.)। एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने शुक्रवार को कहा कि उसने बारामूला की स्पेशल एंटी-करप्शन कोर्ट में फायर एंड इमरजेंसी सर्विस के एक अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। अधिकारी पर सोपोर में फायर सेफ्टी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) जारी करने के लिए रिश्वत मांगने और लेने का आरोप है।

प्रवक्ता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर asibi ने आज बारामूला की स्पेशल एंटी-करप्शन कोर्ट में आरोपी सरकारी कर्मचारी निसार अहमद वानी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। वानी उस समय सोपोर में फायर एंड इमरजेंसी सर्विस में सीनियर फायरमैन (बेल्ट नंबर 1748) थे। यह मामला पुलिस स्टेशन एसीबी बारामूला में दर्ज एफआईआर नंबर 16/2024 से जुड़ा है।

उन्होंने बताया कि यह मामला 16 दिसंबर, 2024 को 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988' (2018 में संशोधित) की धारा 7 के तहत दर्ज किया गया था। यह मामला बारामूला के एक निवासी की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि सोपोर में फायर एंड इमरजेंसी सर्विस में तैनात सीनियर फायरमैन निसार अहमद वानी ने अवैध रिश्वत की मांग की थी।

प्रवक्ता ने कहा, शिकायतकर्ता का आरोप था कि आरोपी ने जानबाजपोरा, बारामूला में लकड़ी बिक्री डिपो स्थापित करने के लिए जरूरी फायर सेफ्टी एनओसी जारी कराने के लिए अवैध रिश्वत की मांग की थी। यह भी आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने आवेदन से जुड़े खर्चों के लिए शिकायतकर्ता से पहले ही 1,500 रुपये ले लिए थे और बाद में ईंधन शुल्क और अन्य खर्चों के बहाने अवैध रिश्वत के तौर पर 5,000 रुपये की मांग की थी।

उन्होंने कहा कि गुप्त जांच के बाद जिसमें आरोपों की शुरुआती पुष्टि हुई, एसीबी ने मामला दर्ज किया और एक ट्रैप टीम बनाई। 16 दिसंबर 2024 को की गई ट्रैप कार्रवाई के दौरान आरोपी को शिकायतकर्ता से अवैध रिश्वत मांगते और लेते हुए पकड़ा गया। प्रवक्ता ने कहा, आरोपी के पास से स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में रिश्वत की वह रकम बरामद की गई। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी श्रीनगर की जांच में आरोपी के हाथ और जेब को धोने पर मिले सैंपल में फेनोल्फथलीन और सोडियम कार्बोनेट होने की पुष्टि हुई। आरोपी को कानून की उचित प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार किया गया और बाद में माननीय अदालत ने उसे ज़मानत पर रिहा कर दिया।

उन्होंने बताया कि जांच पूरी होने के बाद, सक्षम अधिकारी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 19 के तहत मुकदमा चलाने की मंज़ूरी दे दी।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह