जम्मू विश्वविद्यालय के सिलेबस में जिन्ना की एंट्री पर अभाविप का विरोध, बदलाव वापस लेने की मांग

 

जम्मू, 19 मार्च (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जम्मू-कश्मीर ने जम्मू विश्वविद्यालय के पॉलिटिकल साइंस स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में किए गए हालिया बदलावों का कड़ा विरोध जताया है। परिषद ने आरोप लगाया कि मुहम्मद अली जिन्ना से संबंधित विषयों को भारतीय राष्ट्रीय विचारकों के साथ शामिल करना छात्र भावनाओं और राष्ट्रीय मूल्यों के विपरीत है।

एबीवीपी के अनुसार एनईपी-2020 के तहत संशोधित “मॉडर्न इंडियन पॉलिटिकल थॉट” के कोर पेपर में “माइनॉरिटीज एंड द नेशन” यूनिट के अंतर्गत जिन्ना को शामिल किया गया है जिससे छात्रों, शिक्षाविदों और आम जनता में चिंता का माहौल है। परिषद का कहना है कि विश्वविद्यालयों में अकादमिक चर्चा के साथ-साथ राष्ट्रीय दृष्टिकोण और ऐतिहासिक तथ्यों का संतुलन भी आवश्यक है।

परिषद ने कहा कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और बी. आर. अंबेडकर जैसे महान नेताओं के साथ जिन्ना का नाम जोड़ना पूरी तरह अस्वीकार्य है। इससे इतिहास की समझ प्रभावित हो सकती है और छात्रों में भ्रम पैदा हो सकता है। एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस निर्णय के पीछे की मंशा स्पष्ट करने की मांग करते हुए तत्काल इस बदलाव को वापस लेने की अपील की है। साथ ही पाठ्यक्रम की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग उठाई गई है, ताकि इसे राष्ट्रीय हित और शैक्षणिक गुणवत्ता के अनुरूप बनाया जा सके।

एबीवीपी के जम्मू-कश्मीर राज्य सचिव सन्नक श्रीवत्स ने कहा कि अकादमिक स्वतंत्रता का मतलब राष्ट्रीय भावनाओं की अनदेखी नहीं हो सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया तो संगठन जम्मू-कश्मीर भर में लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेगा। वहीं राज्य कार्यालय सचिव अश्विनी सपोलिया ने बताया कि एबीवीपी छात्र हितों और राष्ट्रीय मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और आवश्यकता पड़ने पर व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन तेज किए जाएंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा