वेद ज्ञान और यज्ञ से ही संभव है सुखमय जीवन-स्वामी राम स्वरूप जी
कठुआ, 06 मई (हि.स.)। वेद मन्दिर योल में आयोजित 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 25वें दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप जी ने कहा कि प्रत्येक जीव स्वभाव से दुःख से दूर और सुख की प्राप्ति की इच्छा रखता है। उन्होंने बताया कि हम सभी जीवात्माएं हैं जिनका स्वरूप शुद्ध एवं चेतन है किन्तु प्रकृति के भौतिक पदार्थों की ओर आकर्षित होकर मनुष्य पाप-पुण्य कर्म करता है और उन्हीं कर्मों के अनुसार उसे दुःख और सुख का फल भोगना पड़ता है।
स्वामी जी ने ऋग्वेद मंत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि वेद विद्या, आरोग्यता और समृद्धि प्रदान करने वाला तथा दुःखों का नाश करने वाला केवल एक परमेश्वर ही है। इसलिए मनुष्य को उसी एक परमेश्वर से सुख की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परमेश्वर के गुण, कर्म और स्वभाव को जानने के लिए वेदज्ञ विद्वानों की शरण में जाकर वेदों एवं शास्त्रों का अध्ययन करना आवश्यक है, साथ ही उस ज्ञान को जीवन में अपनाकर ही सच्चा सुख प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने आगे बताया कि ऋग्वेद के अनुसार जो व्यक्ति वेद विद्या प्राप्त कर यज्ञ आदि का विधिपूर्वक पालन करता है, वही वास्तविक सुख का अधिकारी होता है। परमेश्वर सर्वव्यापक है और प्रत्येक व्यक्ति के पाप-पुण्य को जानकर उसी के अनुसार फल प्रदान करता है।
स्वामी जी ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में सदा सुखी रहने के लिए वेदों में बताए गए मार्गकृयज्ञ, योगाभ्यास, नाम-स्मरण और आचार्य की शरण में वेदाध्ययनकृका अनुसरण करना आवश्यक है। अंत में उन्होंने एक प्रेरणादायक दोहे के माध्यम से कर्मों के महत्व को समझाया, “करता था सो क्यों किया, अब करि क्यों पछताए। बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से खाए।”
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया