वेद मन्दिर योल में यज्ञानुष्ठान का 51वां दिन-स्वामी राम स्वरूप ने सामवेद मंत्रों का महत्व समझाया
कठुआ, 01 जून (हि.स.)। वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 51वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी योगाचार्य ने सामवेद के मन्त्र 1826 पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को गूढ़ आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान किया।
उन्होंने ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 129 का उल्लेख करते हुए बताया कि परमेश्वर ने रजोगुण, तमोगुण और सतोगुण युक्त प्रकृति से इस संसार, मन, बुद्धि और शरीर की रचना की है। जिस प्रकार मिट्टी से बने घड़े में मिट्टी के गुण होते हैं, उसी प्रकार मनुष्य के मन और शरीर में भी इन तीनों गुणों का प्रभाव होता है। उन्होंने समझाया कि रजोगुण काम-क्रोध और लोभ से जुड़ा है, तमोगुण आलस्य और निद्रा का कारण है जबकि सतोगुण अहंकार से संबंधित होता है। स्वामी जी ने कहा कि जब जीवात्मा इन गुणों के प्रभाव में आती है तो वह अविद्या और अन्य अवगुणों से प्रभावित हो जाती है। सामवेद मंत्र 1826 के माध्यम से उन्होंने बताया कि जो मनुष्य इन अवगुणों से दूर रहकर वेद मार्ग पर चलते हैं और ईश्वर की उपासना करते हैं, उन्हें परमेश्वर अपना मित्र बनाकर सुख, सुरक्षा और सच्चे ज्ञान का आशीर्वाद देता है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस उपदेश को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया