हिमाचल में वित्त विभाग की मंजूरी के बिना नहीं होगी नई आउटसोर्स भर्ती, निर्देश जारी

 


शिमला, 18 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब किसी भी सरकारी विभाग, बोर्ड, निगम या सरकारी कॉलेज में वित्त विभाग की पूर्व लिखित मंजूरी के बिना नई आउटसोर्स भर्ती नहीं की जा सकेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आउटसोर्स व्यवस्था केवल अस्थायी जरूरत पूरी करने के लिए है और इसे नियमित रोजगार का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।

इस संबंध में वित्त विभाग ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन्हें लागू करते हुए उच्च शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी सरकारी डिग्री और संस्कृत कॉलेजों के प्राचार्यों को भी आदेश भेजकर इनका सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही 13 अक्तूबर 2022 को जारी पुराने आदेश रद्द कर दिए गए हैं।

सरकार ने कहा है कि समीक्षा के दौरान यह सामने आया है कि कई विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या स्वीकृत पदों से अधिक हो गई है। कुछ स्थानों पर ऐसे पदों पर भी आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं, जहां नियमित पद पहले से भरे हुए हैं। ऐसे मामलों की अब विभागवार समीक्षा की जाएगी और कर्मचारियों की संख्या वास्तविक आवश्यकता के अनुसार तय होगी।

नए निर्देशों के अनुसार जिन पदों पर नियमित भर्ती हो चुकी है, वहां आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की जाएगी। विभागों को खाली स्थायी पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी करने के लिए कहा गया है। सरकार का कहना है कि आउटसोर्स व्यवस्था केवल अस्थायी, मौसमी, गैर-कोर और विशेष तकनीकी सेवाओं तक सीमित रहनी चाहिए।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं फिलहाल जारी रहेंगी। यह व्यवस्था नियमित भर्ती पूरी होने तक और विभागीय जरूरत की समय-समय पर होने वाली समीक्षा के आधार पर जारी रहेगी। हालांकि भविष्य में किसी भी नई आउटसोर्स नियुक्ति से पहले वित्त विभाग की पूर्व लिखित मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि कोई विभाग वित्त विभाग की मंजूरी के बिना नई आउटसोर्स नियुक्ति करता है तो उसे अनधिकृत माना जाएगा और संबंधित मामले की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सरकार के अनुसार नए दिशा-निर्देश हाल के उच्चतम न्यायालय और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसलों तथा संवैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखकर जारी किए गए हैं। इनका उद्देश्य सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता बनाए रखना, नियमित भर्ती को बढ़ावा देना, सरकारी खर्च पर नियंत्रण रखना और मानव संसाधन का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा