हिमाचल में जाली प्रमाण पत्र से जमीन खरीदने का आरोप
नाहन, 03 नवंबर (हि.स.)।
सिरमौर जिले के राजगढ़ थाना क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों और जाली कृषक प्रमाण पत्र के आधार पर बड़े पैमाने पर जमीन की खरीद-फरोख्त करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस संबंध में राजगढ़ पुलिस थाना में गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने इस मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता प्रदीप कुमार (पुत्र गोपाल सिंह, निवासी चौपाल, जिला शिमला) द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, मोहाली (पंजाब) निवासी संदीप कुमार और उसके सहयोगियों ने सोलन, शिमला और सिरमौर जैसे विभिन्न जिलों में नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों की संपत्तियों के सौदे किए हैं। आरोप है कि आरोपी ने हिमाचल प्रदेश भूमि सुधार एवं भू-व्यवस्था अधिनियम, 1972 की धारा 118 के कानूनी प्रावधानों को दरकिनार करने के लिए यह पूरा जाल बुना था।
जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी संदीप कुमार ने मंडी जिले के सरकाघाट से एक फर्जी कृषक प्रमाण पत्र हासिल किया था। इस जाली प्रमाण पत्र को बनवाने के लिए आरोपी ने अपनी पहचान और पिता के असली नाम में हेरफेर किया और एक अन्य व्यक्ति (सुरजीत कुमार) को अपना पिता दर्शाते हुए खुद को कृषक साबित किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी होती, तो वे कभी भी अपनी जमीन आरोपी को नहीं बेचते।
शिकायत के मुताबिक इस फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर 26 मार्च 2024 को राजगढ़ के नया नेटी क्षेत्र में जमीन की रजिस्ट्री करवाई गई। इसके बाद इसी दस्तावेज और उसके आधार पर बने नए प्रमाण पत्रों के बल पर कंडाघाट, पझौता (सिरमौर) और सुन्नी (शिमला) सहित कई अन्य स्थानों पर भी जमीनों के सौदे किए गए। इतना ही नहीं, आरोपी ने कथित तौर पर जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए इन संपत्तियों को अपने बेटे वंश लुथरा के नाम पर भी ट्रांसफर करवा लिया।
प्रारंभिक जांच और दस्तावेजों के अवलोकन से यह भी अंदेशा जताया गया है कि सरकारी तंत्र और प्रशासनिक अधिकारियों को चकमा देने के लिए अलग-अलग पतों वाले कई आधार कार्डों का इस्तेमाल किया गया है।
राजगढ़ के डीएसपी विद्या चंद नेगी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राजगढ़ पुलिस ने आईपीसी की धारा 465, 468, 471, 420 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में आगमी जांच जारी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर