हिमाचल में छात्रवृत्ति लेने वाले विद्यार्थियों का होगा सत्यापन, रिकार्ड खंगालेगा शिक्षा विभाग

 

शिमला, 23 जून (हि.स.)। केंद्र सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ लेने वाले विद्यार्थियों की पात्रता और उपस्थिति की जांच के लिए हिमाचल प्रदेश में व्यापक भौतिक सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशालय ने राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) के माध्यम से छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के सत्यापन को लेकर सभी उपनिदेशकों, सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों और उच्च विद्यालयों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

निदेशालय के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2025-26 और 2026-27 के दौरान सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों में छात्रवृत्ति लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। इसके तहत निरीक्षण टीमें राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल से प्राप्त लाभार्थियों की सूची का रिकॉर्ड से मिलान करेंगी और यह जांचेंगी कि संबंधित विद्यार्थी संस्थान में नियमित रूप से अध्ययन कर रहा है तथा छात्रवृत्ति के लिए निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करता है या नहीं।

निर्देशों में कहा गया है कि यदि निरीक्षण के दौरान कोई छात्र अनुपस्थित पाया जाता है तो उसकी अनुपस्थिति का कारण संस्थान प्रमुख से प्रमाणित करवाकर रिपोर्ट के साथ संलग्न करना होगा। इसके अलावा लंबित छात्रवृत्ति आवेदनों, उनके लंबित रहने के कारणों और ऐसे विद्यार्थियों का पूरा विवरण भी देना होगा जिन्होंने संस्थान छोड़ दिया है।

निदेशालय ने छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों के सत्यापन पर भी विशेष जोर दिया है।

निरीक्षण टीमों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों की संख्या का सही रिकॉर्ड उपलब्ध हो और कोई भी डे-स्कॉलर छात्र छात्रावासी श्रेणी के तहत मिलने वाली छात्रवृत्ति का लाभ न ले रहा हो।

सभी निरीक्षण टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट तैयार करें, सभी कॉलम पूरी तरह भरें, समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर करवाएं और संस्थान की आधिकारिक मुहर भी लगाएं।

उच्च शिक्षा निदेशालय ने संबंधित अधिकारियों और संस्थानों को तय समयसीमा के भीतर सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए हैं।

निदेशालय का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य छात्रवृत्ति योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना, अपात्र लाभार्थियों की पहचान करना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता का लाभ वास्तव में पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा