हिमाचल में 108-102 एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल, मरीजों को निजी वाहनों का लेना पड़ा सहारा
शिमला, 06 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की पांच दिन की हड़ताल शुरू हो गई है। इस कारण कई जगह मरीजों को एंबुलेंस नहीं मिल सकी और उन्हें निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। हड़ताल 11 अप्रैल तक जारी रहेगी। कर्मचारियों की इस प्रदेशव्यापी हड़ताल का असर राजधानी शिमला सहित कई जिलों में देखने को मिला है।
शिमला के आईजीएमसी, डीडीयू और केएनएच अस्पतालों के बाहर एंबुलेंस खड़ी रहीं, लेकिन सेवाएं प्रभावित रहने से मरीजों को अस्पताल से घर या दूसरे अस्पताल ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीजों और उनके परिजनों को मजबूर होकर निजी वाहनों की व्यवस्था करनी पड़ी। अस्पताल प्रशासन की ओर से वैकल्पिक इंतजाम किए गए, लेकिन ये पर्याप्त नहीं रहे।
हिमाचल प्रदेश 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन, जो सीटू से संबंधित है, के बैनर तले सैकड़ों कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर शिमला पहुंचे हैं। कर्मचारियों ने छोटा शिमला स्थित सचिवालय के बाहर पांच दिन का महापड़ाव शुरू किया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
धरने को संबोधित करते हुए सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने आरोप लगाया कि नेशनल हेल्थ मिशन के तहत मेडस्वान फाउंडेशन के अधीन काम कर रहे पायलट, कैप्टन और ईएमटी कर्मचारियों को सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि कर्मचारियों से 12 घंटे ड्यूटी ली जाती है, लेकिन ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता।
यूनियन का यह भी कहना है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट, लेबर कोर्ट, सीजेएम कोर्ट शिमला और श्रम विभाग के आदेशों के बावजूद कई वर्षों से कर्मचारियों की समस्याएं हल नहीं हुई हैं। कर्मचारियों को नियमानुसार छुट्टियां नहीं दी जातीं और यूनियन से जुड़े कर्मचारियों का तबादला या मानसिक दबाव बनाने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
कर्मचारियों ने ईपीएफ और ईएसआई में गड़बड़ियों का भी मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि वेतन से दोनों हिस्सों की कटौती कर्मचारियों से ही की जा रही है, जिससे हर महीने आर्थिक नुकसान हो रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि पहले जीवीके ईएमआरआई कंपनी के तहत काम करने के दौरान सेवा समाप्ति पर जो छंटनी भत्ता, ग्रेच्युटी और अन्य भुगतान नहीं मिले, उन्हें भी दिया जाए।
यूनियन ने मांग की है कि कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिया जाए, 12 घंटे की ड्यूटी पर डबल ओवरटाइम मिले, छुट्टियों का प्रावधान लागू किया जाए और अदालतों तथा श्रम विभाग के आदेशों को तुरंत लागू किया जाए। साथ ही सेवा की निरंतरता और वरिष्ठता का लाभ भी देने की मांग उठाई गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा