हिमाचल के पेंशनभोगी 30 सितंबर तक जमा कर सकेंगे जीवन प्रमाण-पत्र
शिमला, 21 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशन पाने वाले लोग 30 सितंबर 2026 तक अपना जीवन प्रमाण-पत्र जमा कर सकेंगे। राज्य सरकार ने जीवन प्रमाण-पत्र जमा करने की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से करने की व्यवस्था की है।
एक सरकारी प्रवक्ता के अनुसार पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों को अपना जीवन प्रमाण-पत्र जीवन प्रमाण एप्लिकेशन के माध्यम से प्रस्तुत करना होगा। यह व्यवस्था हिमाचल प्रदेश कोषागार नियमों और वित्त विभाग की ओर से जारी निर्देशों के तहत लागू की गई है।
पेंशनभोगी कॉमन सर्विस सेंटर और लोक मित्र केंद्र से भी जीवन प्रमाण-पत्र बनवा सकते हैं। इन केंद्रों पर बायोमेट्रिक उपकरण उपलब्ध होने जरूरी हैं। इसके अलावा पेंशनभोगी जीवन प्रमाण पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्रमाण-पत्र बना सकते हैं। वे अपने मोबाइल फोन पर जीवन प्रमाण एप्लिकेशन का इस्तेमाल करके भी डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र जनरेट कर सकते हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार ने भारतीय डाक भुगतान बैंक यानी आईपीपीबी को पेंशनभोगियों के डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र के सत्यापन और उसे जारी करने के लिए अधिकृत किया है। पेंशनभोगी यह सुविधा राज्य में आईपीपीबी की शाखाओं और डाकघरों से ले सकते हैं। इसके साथ ही घर पर सेवा लेने का विकल्प भी उपलब्ध है।
इस सुविधा के तहत आईपीपीबी की डोरस्टेप सेवा के जरिए पेंशनभोगी अपने घर से ही डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र के लिए जरूरी सत्यापन करवा सकते हैं। इससे उन लोगों को सुविधा मिलेगी जिन्हें किसी केंद्र या डाकघर तक जाने में परेशानी होती है।
हालांकि, ऐसे पेंशनभोगी जो चिकित्सकीय रूप से बायोमेट्रिक सत्यापन कराने में सक्षम नहीं हैं, वे पहले की तरह मैनुअल जीवन प्रमाण-पत्र जमा कर सकेंगे। इसके लिए प्रमाण-पत्र संबंधित चिकित्सक से विधिवत प्रमाणित होना जरूरी होगा।
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि आधार आधारित प्रमाणीकरण के बाद जीवन प्रमाण पोर्टल से ऑनलाइन जारी डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र को वैध प्रमाण-पत्र के रूप में स्वीकार किया जाएगा। जीवन प्रमाण के माध्यम से किया गया बायोमेट्रिक सत्यापन एक साल तक वैध रहेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा