सुक्खू सरकार पर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप, भाजपा ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, कार्रवाई की मांग
शिमला, 25 मई (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हिमाचल प्रदेश में चल रहे नगर निकाय और पंचायती राज चुनावों के दौरान कांग्रेस की सुक्खू सरकार पर आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन, सत्ता के दुरुपयोग और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाते हुए राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल की अध्यक्षता व नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की मौजूदगी में पार्टी के एक प्रतिनिधमंडल द्वारा सोमवार को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार ऐसे फैसले ले रही है, जिनसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
भाजपा ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं, जिला परिषद, बीडीसी और नगर निकायों से जुड़े चुनाव चल रहे हैं और पूरे प्रदेश में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू है। इसके बावजूद सरकार द्वारा प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं, जिनसे चुनावी माहौल प्रभावित हो रहा है। ज्ञापन में कहा गया है कि चुनावी प्रक्रिया के बीच चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनावों को प्रभावित करने के लिए नियमों और अधिसूचनाओं में बदलाव की चर्चाएं भी सामने आई हैं, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ हैं।
भाजपा ने अपने ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 243-O और 243-ZA का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव स्वतंत्र और समयबद्ध तरीके से करवाना संवैधानिक जिम्मेदारी है। पार्टी ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका का भी हवाला दिया, जिसमें चुनावी प्रक्रिया में देरी और हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया गया है। भाजपा का कहना है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों पर दबाव बनाने और प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल कर चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
ज्ञापन में भाजपा ने 22 मई को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद कैबिनेट बैठक में कई ऐसे फैसले लिए गए, जिनका सीधा असर मतदाताओं, कर्मचारियों, महिलाओं और युवाओं पर पड़ता है। इनमें इंदिरा गांधी प्यारी बहना योजना में बदलाव, महिलाओं को आय सीमा के आधार पर 1500 रुपये देने का फैसला, विभिन्न विभागों में 2215 पद भरने की मंजूरी, 1500 शिक्षकों की भर्ती, कर्मचारियों के मानदेय और वेतन में बढ़ोतरी, प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए आयोग गठन और नए कार्यालय खोलने जैसे फैसले शामिल हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान इस तरह की घोषणाएं और वित्तीय लाभ से जुड़े फैसले मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से किए गए हैं। पार्टी ने कहा कि प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन, नए एसडीएम कार्यालयों की मंजूरी और नई घोषणाओं का चुनावी माहौल पर असर पड़ सकता है।
भाजपा ने राज्यपाल से मांग की है कि चुनाव आचार संहिता के दौरान हुई कैबिनेट बैठक और उसमें लिए गए फैसलों की संवैधानिक और प्रशासनिक समीक्षा करवाई जाए। पार्टी ने यह भी मांग की है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक इन फैसलों और घोषणाओं के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाए। इसके अलावा भाजपा ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए नियमों और अधिसूचनाओं में बदलाव के प्रयासों की न्यायिक और प्रशासनिक जांच, सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल की स्वतंत्र जांच और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने के मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई है।
ज्ञापन में भाजपा ने उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने, नगर निकाय और पंचायती राज चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष माहौल में करवाने तथा चुनावों को प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई घोषणाओं और फैसलों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग भी राज्यपाल से की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा