शिमला में पेंशनरों का प्रदर्शन, 30 मार्च को विधानसभा घेराव की चेतावनी

 

शिमला, 16 मार्च (हि.स.)। अपनी लंबित देनदारियों को लेकर पेंशनरों ने सोमवार को राजधानी शिमला में प्रदर्शन किया। विभिन्न पेंशनर संगठनों से जुड़े लोगों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर इकट्ठा होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई।

पेंशनरों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने आगामी बजट में उनकी लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए कोई प्रावधान नहीं किया तो 30 मार्च को बड़ी संख्या में पेंशनर शिमला पहुंचकर विधानसभा का घेराव करेंगे।

यह प्रदर्शन हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले किया गया। समिति के अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा ने बताया कि प्रदेश के पेंशनर लंबे समय से अपनी देनदारियों के भुगतान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इसी कारण पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन किए जा रहे हैं, जिससे सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया जा सके।

भूप राम वर्मा ने बताया कि एक जनवरी 2016 से वर्ष 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की कई देनदारियां अब भी लंबित हैं। इसके अलावा अन्य पेंशनरों को मिलने वाले कुछ वित्तीय लाभ भी अभी तक जारी नहीं किए गए हैं। उनका कहना है कि पेंशनरों की ओर से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर बातचीत के लिए समय मांगा गया था, लेकिन अब तक उन्हें वार्ता के लिए नहीं बुलाया गया है।

उन्होंने कहा कि पेंशनरों को उम्मीद है कि 21 मार्च को पेश होने वाले राज्य बजट में उनकी लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए प्रावधान किया जाएगा। अगर बजट में इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की जाती है, तो पेंशनर आंदोलन को और तेज करेंगे।

पेंशनर नेताओं ने चेतावनी दी कि 30 मार्च को प्रदेश के अलग-अलग जिलों से करीब 15 से 20 हजार पेंशनर शिमला पहुंच सकते हैं। उस दिन वे विधानसभा का घेराव कर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराएंगे और अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाएंगे।

प्रदर्शन के दौरान पेंशनरों ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक सरकारी सेवाओं में काम किया है और अब सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द उनकी लंबित देनदारियों का भुगतान करना चाहिए, जिससे पेंशनरों को राहत मिल सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा