शिमला में आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन, स्थायी पॉलिसी की मांग तेज

 

शिमला, 27 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में पहुंचे आउटसोर्स कर्मचारियों ने शिमला के चौड़ा मैदान में जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार से उनके लिए स्थायी नीति बनाने और नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई।

प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से विभिन्न सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज तक उनके भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं बन पाई है। उनका कहना है कि वर्षों से काम करने के बावजूद वे अस्थिर रोजगार की स्थिति में हैं, जिससे उनके परिवारों पर भी असर पड़ रहा है।

प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी संघ की संयोजक अश्विनी शर्मा ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि प्रदेश के कई आउटसोर्स कर्मचारी पिछले करीब 15 वर्षों से अलग-अलग विभागों में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है और न ही नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाई है। उन्होंने बताया कि अधिकांश कर्मचारियों को हर महीने केवल 10 से 12 हजार रुपये तक वेतन मिल रहा है, जो बढ़ती महंगाई के दौर में परिवार चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है।

कर्मचारियों ने सरकार से मांग की कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए जल्द स्थायी पॉलिसी बनाई जाए और उन्हें 58 साल तक नौकरी की सुरक्षा दी जाए। उनका कहना है कि यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है तो हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों को राहत मिलेगी।

प्रदर्शन में प्रदेश के कई जिलों से पहुंचे कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को दोहराया और उम्मीद जताई कि बजट सत्र के दौरान सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनेगी। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं और अब उन्हें सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है।

आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने चेतावनी भी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में जिला स्तर पर कर्मचारियों को संगठित कर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। कर्मचारियों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं और सरकार से संवाद के जरिए समाधान चाहते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा