शिमला में आंगनबाड़ी कर्मियों का प्रदर्शन, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
शिमला, 23 फ़रवरी (हि.स.)। राजधानी शिमला में आंगनबाड़ी वर्करज़ एवं हैल्परज़ यूनियन (संबंधित सीटू) की प्रोजेक्ट कमेटी ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार को महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में जुटे आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स ने विभाग की कथित उदासीनता के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निदेशक को मांग पत्र सौंपा।
प्रदर्शन में यूनियन से जुड़े कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि आंगनबाड़ी कर्मियों से लगातार अतिरिक्त काम लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें जरूरी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं करवाई जा रही हैं। उनका कहना है कि कई-कई महीनों तक वेतन न मिलने से कर्मियों को गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नेताओं ने यह भी कहा कि पुराने और खराब मोबाइल फोन, लंबित रिचार्ज भुगतान, स्टेशनरी और किचन सामग्री की कमी, कम ढुलाई दर और प्रोत्साहन राशि में देरी के कारण कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
यूनियन ने ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाली आंगनवाड़ी कर्मी हर्षा के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को करुणामूलक आधार पर नौकरी देने की मांग भी उठाई। इसके अलावा यूनियन ने साफ कहा कि जब तक नए स्मार्ट फोन या टैबलेट उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक ऑफलाइन कार्य बंद किया जाए।
मांग पत्र में सीबीई इंसेंटिव को ऑफलाइन बिल के आधार पर देने, पोषण ट्रैकर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं को दूर करने, गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने, वर्दी भत्ता देने, मेडिकल अवकाश और छुट्टियां सुनिश्चित करने तथा आयुष्मान कार्ड में पूरे परिवार को शामिल करने जैसी मांगों को भी प्रमुखता से रखा गया।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि विभाग ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो यूनियन अपने आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होगी। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी विभाग की होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा