रेणुका क्षेत्र में अदरक की खेती पर रोग की आशंका, कृषि वैज्ञानिक पहुंचे निरीक्षण को
नाहन, 18 सितंबर (हि.स.)। जिला सिरमौर के विकास खंड संगड़ाह के गांव काकोग में अदरक की फसल में फाइलोस्टिक्टा ब्लाइट रोग का प्रकोप पाया गया है। कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का मौके पर निरीक्षण किया और किसानों को रोग की रोकथाम एवं प्रबंधन के लिए आवश्यक सलाह दी।
रोग की स्थिति का जायजा लेने और किसानों को जागरूक करने के लिए डॉ. पंकज मित्तल, सह निदेशक एवं वैज्ञानिक प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर के साथ डॉ. साहब सिंह उपनिदेशक कृषि, डॉ. नवदीप कौंडल परियोजना निदेशक (आत्मा) तथा विकास खंड संगड़ाह और नाहन के विषय वस्तु विशेषज्ञों ने काकोग गांव के प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने मौके पर फसल का निरीक्षण कर किसानों को रोग के प्रभावी प्रबंधन, खेत की स्वच्छता, उचित जल निकासी, संतुलित पोषण और फफूंदनाशकों के सुरक्षित एवं सही छिड़काव की जानकारी दी।
रोग प्रभावित खेतों के निरीक्षण के दौरान अदरक की पत्तियों पर छोटे, गोल या अनियमित आकार के भूरे अथवा गहरे भूरे धब्बे पाए गए। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार रोग बढ़ने पर ये धब्बे आपस में मिलकर पत्तियों के बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकते हैं। अधिक संक्रमण की स्थिति में पत्तियां सूखने लगती हैं, जिससे पौधे की वृद्धि और कंद के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। लगातार बारिश, अधिक नमी और खेत में हवा का उचित संचार न होना रोग को बढ़ावा देता है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को संक्रमित और अत्यधिक रोगग्रस्त पत्तियों को खेत से निकालकर नष्ट करने की सलाह दी। साथ ही खेत में जलभराव न होने देने और उचित जल निकास की व्यवस्था बनाए रखने को कहा गया। रोगग्रस्त फसल के अवशेषों को खेत में न छोड़ने की भी सलाह दी गई है।विशेषज्ञों ने संतुलित पोषण पर भी जोर दिया। किसानों को नाइट्रोजन उर्वरक का अत्यधिक इस्तेमाल नहीं करने तथा मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित मात्रा में प्रयोग करने को कहा गया। पर्याप्त मात्रा में पोटाश का प्रयोग पौधों को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर