महिला आरक्षण लागू करने की मांग तेज, जनवादी महिला समिति ने सौंपा ज्ञापन
शिमला, 18 जुलाई (हि.स.)। संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति ने शनिवार को हिमाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। समिति ने मांग की कि संसद के आगामी मानसून सत्र में विपक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले विधेयक को बिना किसी देरी के लागू कराया जाए। कांग्रेस ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि महिला आरक्षण को जल्द लागू किया जाना चाहिए।
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राज्य सचिव फालना चौहान ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला विधेयक सत्ता पक्ष और विपक्ष की सहमति से संसद में ध्वनिमत से पारित हो चुका है। उनके अनुसार अब केंद्र सरकार ने इसके लागू होने को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ दिया है, जिससे महिलाओं को उनका अधिकार मिलने में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी महिलाएं हैं और नीति निर्माण में उनकी बराबर की भागीदारी सुनिश्चित होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि समिति देशभर में विपक्षी दलों के माध्यम से ज्ञापन देकर मांग उठा रही है कि मानसून सत्र में इस मुद्दे को सदन में उठाया जाए और परिसीमन की शर्त हटाकर विधेयक को जल्द लागू किया जाए।
वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि कांग्रेस ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया था और अब भी पार्टी इस मांग के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि बाद में विधेयक के साथ परिसीमन की शर्त जोड़ दी गई, जिसके कारण इसके लागू होने में देरी हो रही है। उनका कहना था कि कांग्रेस लगातार मांग कर रही है कि जिस स्वरूप में सभी दलों की सहमति से विधेयक पारित हुआ था, उसी स्वरूप में इसे लागू किया जाए, जिससे महिलाओं को उनका अधिकार मिल सके।
इस दौरान विनय कुमार ने धर्मशाला में प्रस्तावित कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक टलने की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि खराब मौसम और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल की व्यस्तता के कारण बैठक को सात से दस दिन के लिए स्थगित किया गया है। बैठक का नया स्थान मौसम की स्थिति को देखते हुए धर्मशाला या कसौली में तय किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बैठक में संगठन को मजबूत बनाने, संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और वर्ष 2027 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा