परीक्षा केंद्रों को लेकर शिक्षकों में रोष

 

नाहन, 20 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से मान्यता दिलाने के लिए 22 मार्च को एक विशेष परीक्षा आयोजित की जा रही है। लेकिन इस परीक्षा के लिए बनाए गए केंद्रों को लेकर अब प्रदेश भर में विवाद खड़ा हो गया है। हिमाचल शिक्षा बोर्ड ने परीक्षा से मात्र तीन दिन पहले एडमिट कार्ड जारी किए हैं, जिनमें परीक्षा देने वाले शिक्षकों को उनके अपने जिलों से बाहर बहुत दूर के केंद्र थमा दिए गए हैं।

सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि खराब मौसम के बावजूद किन्नौर के उम्मीदवारों को धर्मशाला, सिरमौर वालों को शिमला और सोलन, जबकि ऊना के शिक्षकों को कांगड़ा जिला में परीक्षा देने के लिए बुलाया गया है। इतनी लंबी दूरी तय करना शिक्षकों के लिए मानसिक और आर्थिक, दोनों रूप से परेशानी का सबब बन गया है।

इस मामले में एक बड़ी तकनीकी समस्या यह भी है कि 23 मार्च को प्रदेश में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं होनी हैं। इस परीक्षा में बैठने वाले कई शिक्षक वर्तमान में बोर्ड परीक्षाओं के संचालन में केंद्र अधीक्षक या अन्य महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैं। बोर्ड के नियमों के मुताबिक, ये शिक्षक अपना ड्यूटी केंद्र छोड़कर कहीं और नहीं जा सकते। ऐसे में एक दिन पहले दूसरे जिले में जाकर परीक्षा देना और अगले ही दिन अपनी ड्यूटी पर तैनात होना मुमकिन नहीं लग रहा है।

हिमाचल प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ के राज्य चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर और जिला सिरमौर अध्यक्ष डॉ. आई.डी. राही ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों से लगभग 55 से 60 लाख रुपये का भारी-भरकम शुल्क लिया गया है, ऐसे में कम से कम जिला स्तर पर तो परीक्षा केंद्र बनाए ही जा सकते थे। संघ ने मांग की है कि बोर्ड सचिव इस मामले में तुरंत दखल दें और आज ही नई अधिसूचना जारी कर परीक्षा देने वालों को उनके जिले के भीतर या पास के केंद्र आवंटित करें।

संघ का यह भी कहना है कि यदि आज इस पर फैसला नहीं हुआ, तो किन्नौर जैसे दूर-दराज इलाकों के शिक्षकों को आज ही अपने घरों से निकलना पड़ेगा। गौरतलब है कि यह मामला फिलहाल माननीय उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है, जिस पर आज सुनवाई होनी है। ऐसे में केंद्र आवंटन की यह अव्यवस्था परीक्षा में एक बड़ी बाधा साबित हो सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर