नववर्ष पर गुरु की शरण में पांवटा साहिब, ऐतिहासिक गुरुद्वारे में देश-विदेश से उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
नाहन, 01 जनवरी (हि.स.)। नए वर्ष के पावन अवसर पर ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब आस्था, श्रद्धा और भक्ति का भव्य केंद्र बन गया। सुबह अमृत वेला से ही गुरु घर में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। मान्यता है कि नववर्ष के पहले दिन यहां शीश नवाने से पूरे वर्ष सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली बनी रहती है, इसी विश्वास के साथ हजारों श्रद्धालु गुरु दरबार में पहुंचे।
गुरुद्वारा परिसर दिनभर गुरबाणी कीर्तन और वाहेगुरु के जयकारों से गूंजता रहा। संगत ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेककर परिवार, समाज और देश की तरक्की के लिए अरदास की। इस अवसर पर केवल हिमाचल व आसपास के राज्यों से ही नहीं, बल्कि विदेशों से आए श्रद्धालु भी गुरु घर में नतमस्तक होते नजर आए, जिन्होंने सिख परंपरा और सेवा भावना की सराहना की।
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा श्रद्धालुओं के लिए ठहरने, सुरक्षा और गुरु के लंगर की शानदार व्यवस्था की गई। लंगर हॉल में सभी ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया, जो सिख धर्म की समानता और भाईचारे का संदेश देता है। सेवादारों ने पूरे समर्पण के साथ संगत की सेवा की, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
गौरतलब है कि गुरुद्वारा श्री पांवटा साहिब सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। यमुना नदी के तट पर स्थित इस पावन भूमि पर गुरु गोबिंद सिंह ने कई वर्ष निवास किया और अनेक धार्मिक व साहित्यिक रचनाओं की रचना की। यही कारण है कि यह गुरुद्वारा केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि सिख इतिहास और आस्था का जीवंत प्रतीक भी है
मैनेजर जागीर सिंह ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी नववर्ष, गुरुपर्व और विशेष पर्वों पर यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं का कहना है कि गुरु की इस धरती पर आकर मन को अद्भुत शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
नववर्ष के पहले दिन पांवटा साहिब का ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्रद्धा और विश्वास का साक्षी बना, जहां संगत ने बीते वर्ष की परेशानियों को पीछे छोड़ते हुए नए साल की शुरुआत गुरु की शरण में जाकर की और सुख-समृद्धि की कामना की।
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हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर