ठियोग के देहना में किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग पर किया जागरूक
शिमला, 25 अप्रैल (हि.स.)। ठियोग उपमंडल के देहा में किसानों के बीच संतुलित उर्वरक उपयोग को लेकर शनिवार को एक जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) के तत्वावधान में केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) शिमला के वैज्ञानिकों की टीम द्वारा आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक तरीके से पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जानकारी देना और मिट्टी की उर्वरता के साथ-साथ फसल उत्पादकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों की टीम ने किसानों के साथ सीधा संवाद किया और उनकी खेती से जुड़ी समस्याओं को समझते हुए व्यावहारिक सुझाव दिए। ग्राम पंचायत की प्रधान कंचन स्नैक ने टीम का स्वागत किया और इस तरह के प्रयासों को किसानों के लिए उपयोगी बताया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।
सीपीआरआई के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने कहा कि संतुलित उर्वरक उपयोग खेती के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने किसानों को मिट्टी परीक्षण कराने, पोषक तत्वों के सही अनुपात बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने की सलाह दी। उनका कहना था कि सही जानकारी के अभाव में किसान अक्सर जरूरत से ज्यादा उर्वरक इस्तेमाल कर लेते हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार चौधरी ने रासायनिक, जैविक और जैव उर्वरकों के प्रकारों और उनके उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट और जैव उर्वरकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर हो सके और उत्पादन भी बढ़े।
वहीं, सामाजिक विज्ञान के प्रमुख डॉ. आलोक कुमार ने एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि जैविक और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग से न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि किसानों की आय में भी सुधार हो सकता है। उन्होंने क्षेत्र के अनुसार उर्वरकों के सही समय और सही मात्रा में उपयोग की सलाह दी।
कार्यक्रम में अन्य वैज्ञानिकों ने भी किसानों को आलू की उपयुक्त किस्मों और पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के बारे में जानकारी दी। इस दौरान कई स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा