जुन्गा में एक माह का फिंगरप्रिंट प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न
शिमला, 06 अगस्त (हि.स.)। राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एसएफएसएल), जुन्गा में पिछले एक माह से चल रहा फिंगरप्रिंट प्रशिक्षण कार्यक्रम वीरवार को संपन्न हो गया। प्रशिक्षण में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 23 पुलिस अन्वेषण अधिकारियों तथा चार फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रशिक्षण पूर्ण करने एवं प्रोफिशिएंसी परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सभी प्रतिभागियों को उप निदेशक डॉ. अपर्णा शर्मा द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
प्रशिक्षण के दौरान पुलिस अन्वेषण अधिकारियों को अपराध स्थल से फिंगरप्रिंट एकत्रित करने, उन्हें सुरक्षित रखने तथा वैज्ञानिक परीक्षण एवं विश्लेषण के लिए राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, जुन्गा भेजने की विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली , मोर्फो नामांकन सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन, कैदियों की पहचान अधिनियम, 1920 तथा आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) अधिनियम, 2022 के प्रावधानों की भी विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण में फिंगरप्रिंट के विभिन्न प्रकारों, सर्च, रिकॉर्ड, जेल एवं सैंपल स्लिप की उपयोगिता, फिंगरप्रिंट फोटोग्राफी, संदिग्ध, दोषसिद्ध, बरी एवं ट्रेस किए गए व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड, अदृश्य एवं आकस्मिक निशानों को उभारने के लिए प्रयुक्त विभिन्न प्रकार के पाउडरों तथा फिंगरप्रिंट स्लिप तैयार करते समय बरती जाने वाली सावधानियों पर विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। साथ ही मोर्फो नामांकन सॉफ्टवेयर के माध्यम से तैयार की जाने वाली विभिन्न प्रकार की स्लिपों और उनके उपयोग के बारे में भी प्रतिभागियों को अवगत कराया गया।
निदेशक, फॉरेंसिक सेवाएं, हिमाचल प्रदेश, जुन्गा डॉ. मीनाक्षी महाजन ने कहा कि वर्तमान समय में अपराधों की बढ़ती संख्या के बीच फिंगरप्रिंट विज्ञान का महत्व और अधिक बढ़ गया है। अपराधियों की पहचान स्थापित करने तथा जांच को वैज्ञानिक आधार प्रदान करने में फिंगरप्रिंट अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित अन्वेषण अधिकारी अपराधों के त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
प्रवक्ता एवं राज्य फिंगरप्रिंट ब्यूरो के प्रभारी डॉ. एस.के. पाल ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो देशभर के अपराधियों का रिकॉर्ड संग्रहित एवं संचालित करता है। सभी राज्य एवं एमसीयू प्रणाली के माध्यम से इससे जुड़े हुए हैं, जिसके जरिए फिंगरप्रिंट स्लिपों के आधार पर अपराधियों की पहचान एवं मिलान किया जाता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक से लैस यह प्रणाली अपराध अन्वेषण को अधिक सटीक एवं प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध हो रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा