चीन के दमनकारी कानून के खिलाफ पांवटा की सड़कों पर उतरा तिब्बती समुदाय
नाहन, 03 अगस्त (हि.स.)। चीन द्वारा लागू किए गए तथाकथित 'जातीय एकता एवं प्रगति कानून' के विरोध में सोमवार को पांवटा साहिब में तिब्बती समुदाय का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। क्षेत्रीय तिब्बती युवा कांग्रेस और क्षेत्रीय तिब्बती महिला संघ के संयुक्त नेतृत्व में डिप्टी कॉलोनी से एक रोष रैली निकाली गई। रैली नेशनल हाईवे, अग्रसेन चौक, परशुराम चौक, विश्वकर्मा चौक और बस स्टैंड से होकर गुजरी। इस दौरान बड़ी संख्या में तिब्बती समुदाय के लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर 'फ्री तिब्बत', 'चीन का दमन बंद करो' और 'मानवाधिकारों की रक्षा करो' जैसे नारे लगाए।
रैली के दौरान वक्ताओं ने कहा कि चीन का यह कानून तिब्बती भाषा, संस्कृति, धर्म और पहचान को खत्म करने की साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि तिब्बती बच्चों को उनकी मातृभाषा और संस्कृति से दूर कर जबरन चीनी व्यवस्था में ढालने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में शहीद हुए तिब्बती लोब्सांग रांजेन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बलिदान को तिब्बत की आजादी और पहचान की लड़ाई का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि तिब्बती समुदाय अपने अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखेगा।
रैली के समापन पर संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तिब्बत में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघनों पर प्रभावी हस्तक्षेप करने, चीन पर दबाव बनाने और तिब्बती जनता के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ तथा पूरे मार्ग पर पुलिस प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात रहा।
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हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर