कसुम्पटी में तहसील बनने की तैयारी, 92 हज़ार लोगों को मिलेगी राहत

 


शिमला, 18 जनवरी (हि.स.)। शिमला शहर के आसपास तेजी से बढ़ती आबादी और राजस्व मामलों के बढ़ते दबाव को देखते हुए कसुम्पटी में नई तहसील बनाने का प्रस्ताव जिला प्रशासन शिमला ने प्रदेश सरकार को भेज दिया है। उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने इसकी पुष्टि करते हुए रविवार को कहा कि कसुम्पटी क्षेत्र में नई तहसील बनाना प्रशासनिक रूप से जरूरी हो गया है, ताकि लोगों को समय पर और आसानी से राजस्व से जुड़ी सेवाएं मिल सकें।

वर्तमान में कसुम्पटी क्षेत्र शिमला ग्रामीण तहसील के अंतर्गत आता है। उपायुक्त के अनुसार शिमला ग्रामीण तहसील के तहत इस समय 32 पटवार सर्कल हैं और इसका भौगोलिक क्षेत्र काफी बड़ा है। इसके अंतर्गत कसुम्पटी, शिमला ग्रामीण और शिमला शहरी तीन विधानसभा क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा आता है। शिमला शहर के आसपास लगातार बढ़ रही जनसंख्या, जमीन से जुड़े मामलों, अदालतों में लंबित केसों और फील्ड वेरिफिकेशन के काम के कारण प्रशासन को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

अनुपम कश्यप ने बताया कि नए प्रस्ताव के अनुसार कसुम्पटी तहसील के तहत कुल 17 पटवार सर्कल और 4 फील्ड कानूनगो सर्कल होंगे। इस तहसील का कुल क्षेत्रफल 17,032.29 हेक्टेयर प्रस्तावित किया गया है। इसके अंतर्गत कुल 86,983 खसरा नंबर और 12,080 खतौनी नंबर आएंगे। इस नई तहसील से करीब 91,924 लोगों की आबादी को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

प्रस्ताव के तहत चार नए पटवार सर्कल चमियाना, रझाना, डूम्मी और जनोल बनाए जाएंगे। इसके अलावा दो फील्ड कानूनगो सर्कल कसुम्पटी/चमियाना और शोघी में प्रस्तावित किए गए हैं। उपायुक्त ने बताया कि नई तहसील बनने से क्षेत्र के लोगों को जमीन की रजिस्ट्री, इंतकाल, जमाबंदी, फर्द और अन्य राजस्व मामलों के लिए शिमला ग्रामीण तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

नई तहसील के दायरे में 83 सरकारी स्कूल, 21 पोस्ट ऑफिस, 27 बैंक शाखाएं और कई अन्य सरकारी कार्यालय भी आएंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल कामकाज का बोझ कम होगा, बल्कि लोगों को अपने घर के नजदीक ही सरकारी सेवाएं मिल सकेंगी।

जिला प्रशासन के अनुसार कसुम्पटी और आसपास के क्षेत्रों में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में एक अलग तहसील बनने से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी और आम लोगों की समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा। अब यह प्रस्ताव प्रदेश सरकार के स्तर पर विचाराधीन है और अंतिम निर्णय सरकार द्वारा लिया जाना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा